भिंड में 29.55 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले के बाद योजना लगभग ठप हो गई है। 2400 कार्य अधूरे हैं और मजदूरों को रोजगार नहीं मिलने से पलायन बढ़ रहा है। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 28 May 2026 09:36:47 AM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 09:36:47 AM (IST)

29.55 करोड़ के घोटाले के बाद भिंड में मनरेगा ठप, 2400 काम अधूरे; कार्रवाई फाइलों में अटकी
मनरेगा योजना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सख्ती के चलते लगभग बंद हो गई है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भिंड में 29.55 करोड़ रुपये का मनरेगा घोटाला सामने आया।
  2. घोटाले के बाद 2400 मनरेगा कार्य अधूरे पड़े हुए हैं।
  3. 37 अधिकारी और कर्मचारी जांच में दोषी पाए गए थे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सख्ती के चलते लगभग बंद हो गई है। जिले में करीब 29.55 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले का खुलासा होने के बाद नए कार्यों की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। हालात यह हैं कि जिले में करीब 2400 मनरेगा कार्य अधूरे पड़े हैं और मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

बता दें, कि अक्टूबर 2023 में तत्कालीन अपर आयुक्त काजल जावला ने जिले का दो दिवसीय दौरा कर जांच की थी। उनकी 19 पेज की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि जिले में 29.55 करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे कार्य कराए गए, जो मनरेगा की अनुमत सूची में शामिल ही नहीं थे। जांच में स्कूलों की बाउंड्रीवाल जैसे निर्माण कार्य भी मनरेगा से कराए जाने की बात सामने आई थी, जबकि नियमों के अनुसार ऐसे कार्य योजना में स्वीकृत नहीं हैं।

37 अधिकारी-कर्मचारी दोषी

  • जांच में पंचायत विभाग के 37 अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए गए थे। इनमें जनपद पंचायतों के सीईओ, सहायक यंत्री और सब इंजीनियर स्तर के अधिकारी शामिल थे। हालांकि कार्रवाई संविदा कर्मचारियों तक सीमित रही, जबकि स्थायी अधिकारियों पर कार्रवाई की फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं। जिले की 134 ग्राम पंचायतों के खिलाफ 18.55 करोड़ रुपये की रिकवरी के प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
  • ये मामले जिला पंचायत सीईओ न्यायालय में लंबित हैं, लेकिन अब तक वसूली की दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। बताया गया कि तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे ने फर्जी भुगतान पकड़े जाने के बाद करीब 11 करोड़ रुपये का भुगतान पोर्टल से डिलीट कर दिया था, जिससे आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

मजदूरों पर पड़ा सीधा असर

घोटाले के बाद प्रशासनिक सख्ती का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण मजदूरों पर पड़ा है। सरपंच और सचिव नए मस्टर रोल जारी करने से बच रहे हैं। पहले जहां रोज हजारों मजदूर मनरेगा कार्यों में लगे रहते थे, अब संख्या सैकड़ों में सिमट गई है। रोजगार नहीं मिलने से ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन बढ़ने लगा है।

ठप स्थिति में पहुंची मनरेगा योजना

भिंड जिले में मनरेगा योजना लगभग ठप स्थिति में पहुंच गई है। गांवों में सड़क, तालाब, नाला और अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राजू सिकरवार, जिला उपाध्यक्ष सरपंच संघ भिंड

बकाया राशि वालों की निकाली जा रही राशि

मनरेगा के तहत जिन लोगों पर राशि बकाया है, उनकी जानकारी निकाली जा रही है। संबंधितों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वीर सिंह चौहान, सीईओ जिला पंचायत भिंड



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