ग्वालियर में आवारा कुत्तों के हमले बढ़ने से पांच दिनों में 479 डॉग बाइट केस सामने आए। एंटी-रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक घटकर 125 रह गया, जिससे संकट गहरा गय …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 08 Jun 2026 08:21:14 AM (IST)Updated Date: Mon, 08 Jun 2026 08:21:14 AM (IST)

ग्वालियर में आवारा कुत्तों का आतंक, रोज 200 लोगों को बना रहे शिकार, स्टोर में सिर्फ 125 रेबीज इंजेक्शन
आवारा कुत्तों का आतंक जानलेवा साबित हो सकता है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पांच दिनों में 479 डॉग बाइट मरीज अस्पताल पहुंचे।
  2. सीएमएचओ स्टोर में केवल 125 इंजेक्शन शेष बचे।
  3. दो हजार एंटी-रेबीज इंजेक्शन की मांग भेजी गई।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक जानलेवा साबित हो सकता है। आलम यह है कि गुजरते हर दिन के साथ कुत्तों के काटने के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस बड़े खतरे को लेकर लापरवाह नजर आ रहा है। पिछले पांच दिनों में जया आरोग्य अस्पताल के पीएसएम विभाग की ओपीडी में ही 479 डाग बाइट के केस पहुंच चुके हैं। कमोबेश यही स्थिति मुरार क्षेत्र की भी है, जहां पिछले पांच दिनों में इतने ही मरीज रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे।

इस स्थिति के बीच चिंताजनक खबर यह है कि मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के मेडिसिन स्टोर में एंटी-रेबीज इंजेक्शन का स्टाक लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे आने वाले दिनों में मरीजों की जान पर संकट मंडरा सकता है। शहर में रोजाना सैकड़ों लोग आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं, तब सीएमएचओ मेडिसिन स्टोर में रविवार तक महज 125 रेबीज के इंजेक्शन बचे हैं। यह स्टाक एक दिन के मरीजों के लिए नाकाफी है।

मांग के बावजूद सप्लाई ठप

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संकट को देखते हुए दो हजार नए इंजेक्शनों की मांग भेजी है, लेकिन हकीकत यह है कि संबंधित सप्लाई कंपनी ने इस डिमांड पर अब तक खेप नहीं भेजी है। यदि स्टोर में दवा खत्म होती है, तो मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर रेबीज इंजेक्शन खरीदने होंगे।

हजार बिस्तर अस्पताल पर दबाव

  • आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों का सीधा असर जयारोग्य अस्पताल के हजार बिस्तर अस्पताल में देखने को मिल रहा है। यहां के पीएसएम विभाग की ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ी है। पहले जहां जेएएच की ओपीडी में रोजाना औसतन 70 से 80 डाग बाइट के केस आते थे, वहीं अब यह संख्या 100 के पार पहुंच चुकी है। पांच दिन में 479 केसों में केवल नए मरीज ही नहीं हैं, बल्कि वे मरीज भी शामिल हैं जो रेबीज का दूसरा, तीसरा और पांचवां डोज लगवाने के लिए अस्पताल की कतार में खड़े होने को मजबूर हैं।
  • शहर में नगर निगम के डाग कैचिंग स्क्वाड और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल की कमी को उजागर करती है। एक तरफ सड़कों पर घूमते कुत्ते राहगीरों और बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आपातकालीन इंजेक्शन के स्टाक को लेकर स्वास्थ्य विभाग का कैजुअल रवैया शहरवासियों को एक बड़े खतरे की ओर धकेल रहा है। अगर जल्द ही 2000 इंजेक्शनों की सप्लाई नहीं आई, तो शहर में रेबीज के इलाज के लिए हाहाकार मचना तय है।
  • इंजेक्शन मुहैरा करा दिए जाएंगे

    रेबीज इंजेक्शन की मांग भेजी जा चुकी है। संबंधित कंपनी से सप्लाई होते ही जिन संस्थानों में इंजेक्शन नहीं है वहां मुहैया करा दिए जाएंगे। डॉ प्रबल प्रताप सिंह जिला स्टोर प्रभारी



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