शादी का मंडप, शहनाइयों की गूंज, हाथों की गहरी लाल मेहंदी और आंखों में एक नए संसार के सुनहरे सपने….. एक आम भारतीय परिवार अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी और भावनाएं दांव पर लगा देता है ताकि उसकी बेटी एक नए घर में खुशियों का महल बसा सके लेकिन जब यही खुशियां महज चंद दिनों या महीनों में ‘सफेद कफन’ में तब्दील हो जाएं, तो न सिर्फ कलेजा कांप उठता है बल्कि पूरा समाज कटघरे में खड़ा नजर आता है।
राजधानी भोपाल का हाई-प्रोफाइल त्विषा शर्मा हत्याकांड इस समय खासी चर्चा में है। यह मामला इस बात का जीता-जागता और खौफनाक सबूत है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार और दहेज का दानव सिर्फ अशिक्षित या ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है बल्कि पढ़े-लिखे समाज, ऊंचे रसूखदार बंद कमरों के पीछे भी दरिंदगी पनपती है।
बहरहाल त्विषा के परिवार वालों के दबाव और सरकार के हस्तक्षेप के बाद भोपाल पुलिस ने कल एक बड़ी कार्रवाई के तहत मृतका के पति समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और आज कोर्ट में पेशी के बाद रिमांड मांगने की तैयारी है ताकि पूछताछ में असलियत सामने लाई जा सके। त्विषा शर्मा का यह मामला कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि ये बरसों से हमारे समाज में पल रही एक ऐसी मानसिकता का आईना है, जिसके सामने आते ही कई बार हम उस पर परदा डाल देते हैं।
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