एनओसी नहीं मिलने के कारण इस इलाके में पाइपलाइन बिछाने का कार्य अटका हुआ था। …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 02:21:50 PM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 02:22:27 PM (IST)

550 करोड़ के चंबल प्रोजेक्ट की दो बड़ी बाधाएं दूर... MPIDC से मिली NOC, NHAI ने शुरू की जमीन देना
चंबल प्रोजेक्ट। सोशल मीडिया

HighLights

  1. पाइपलाइन के काम ने पकड़ी रफ्तार
  2. बिजली पोल शिफ्टिंग की चुनौती
  3. इंटेक वेल पर अब भी पेंच

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर की भविष्य की पेयजल आपूर्ति को पूरा करने के महत्वपूर्ण चंबल प्रोजेक्ट की दो बड़ी बाधाएं दूर हो गई हैं। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने के लिए मध्य प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआइडीसी) की ओर से नगर निगम को एनओसी प्राप्त हो गई है, जबकि एनओसी की राशि लेने के बाद भी जगह उपलब्ध नहीं करा रहे नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) के अधिकारियों ने नगर निगम को आवश्यक स्थान उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इससे पाइपलाइन बिछाने में आ रही बाधाएं समाप्त हो गई हैं और काम ने रफ्तार पकड़ी है।

55 किमी लंबी पाइपलाइन परियोजना के 27 किमी हिस्से में काम प्रभावित हो रहा था, वहां अब तेजी से कार्य शुरू कराने की तैयारी कर ली गई है। 27 किमी हिस्से में करीब 10.5 किमी निजी भूमि, 12 किमी लंबाई का हिस्सा एनएचएआइ और शेष एमपीआइडीसी के अंतर्गत आता है। एनओसी नहीं मिलने के कारण इस इलाके में पाइपलाइन बिछाने का कार्य अटका हुआ था।

अब एनओसी मिलने के बाद एमपीआइडीसी क्षेत्र में काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि पहले एमपीआइडीसी द्वारा एनओसी के लिए काफी ज्यादा राशि की मांग की जा रही थी, लेकिन अब सिर्फ 15 लाख रुपये की राशि जमा कराकर एनओसी जारी की गई है।

दूसरी तरफ सांसद भारत सिंह कुशवाह द्वारा पिछले दिनों की गई समीक्षा के बाद एनएचएआइ के अधिकारियों ने भी मुख्यालय से अधिकृत एनओसी आने तक नगर निगम को जगह उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। परियोजना में एक बड़ी चुनौती पोल शिफ्टिंग की भी है। इसको लेकर भी बिजली कंपनी ने दो दिन में सर्वे करने की बात कही है और जिन स्थानों पर बिजली के पोल हटाना संभव नहीं होगा, वहां डक्ट निर्माण के बजाय ओपन पाइपलाइन डाली जाएगी।

चंबल प्रोजेक्ट के अंतर्गत एमपीआइडीसी से एनओसी मिल गई है। उस हिस्से में काम की शुरुआत भी करा दी गई है। एनएचएआइ ने भी जगह उपलब्ध करानी शुरू कर दी है। इससे प्रोजेक्ट के कार्य में तेजी आएगी। -संघ प्रिय, आयुक्त, नगर निगम

करोड़ों हो रहे खर्च, लेकिन इंटेक वेल पर अब भी विवाद

हालांकि इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी समस्या यह है कि मुरैना और ग्वालियर नगर निगम द्वारा इस प्रोजेक्ट पर लगभग 550 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की जाएगी, लेकिन पाइपलाइनों और वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों तक पानी पहुंचाने वाले इंटेक वेल की डिजाइन व जगह ही फाइनल नहीं हुई है। इसी इंटेक वेल से 150 एमएलडी पानी लिया जाएगा, जिसमें से 60 एमएलडी पानी मुरैना नगर निगम और 90 एमएलडी पानी ग्वालियर नगर निगम को मिल सकेगा। ग्वालियर नगर निगम के बचे हुए 60 एमएलडी पानी की पूर्ति कोतवाल बांध से की जाएगी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इंटकवेल निर्माण में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।



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