ज्योतिरादित्य सिंधिया नेतृत्व के सामने बड़ा सवाल है कि जब इन लोगों को पार्टी में आए साढ़े छह वर्ष के लगभग हो गए हैं, तो फिर मूल और बाहर से आए कार्यकर् …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 09:45:58 AM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 09:46:38 AM (IST)

ग्वालियर-चंबल के 'पेच' में अटकी भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति, सिंधिया ने थमाई लंबी सूची; दिल्ली में मंथन शुरू
शिवपुरी प्रवास के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)।

HighLights

  1. शिवपुरी प्रवास के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय मंत्री से इसी मुद्दे पर की थी चर्चा
  2. एक सप्ताह में प्रदेश कार्यसमिति गठित होने की संभावना
  3. 600 से घटकर 100 पर आएगी कार्यसमिति

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार्यसमिति की सूची लेकर सोमवार को फिर प्रदेश भाजपा के नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। जहां कार्यसमिति को अंतिम रूप देने के लिए मंथन किया जा रहा है। दिल्ली रवाना होने से सप्ताहभर पहले प्रदेश अध्यक्ष ने शिवपुरी प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री से बंद कमरे में एक घंटे कार्यसमिति के मुद्दे पर चर्चा की थी। प्रदेश कार्यसमिति में सबसे बड़ा पेच ग्वालियर-चंबल अंचल का फंसा हुआ है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया निगम मंडलों व प्राधिकरणों में हुई नियुक्तियों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। उनके नेतृत्व के सामने बड़ा सवाल है कि जब इन लोगों को पार्टी में आए साढ़े छह वर्ष के लगभग हो गए हैं, तो फिर मूल और बाहर से आए कार्यकर्ताओं में संगठन स्तर पर भेद क्यों किया जा रहा है। सिंधिया ने प्रदेश कार्यसमिति में समर्थकों को समायोजित करने के लिए लंबी सूची थमा दी है। दूसरी तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी सिंधिया की सूची पर नजर रखे हुए हैं। प्रदेश नेतृत्व के सामने मुश्किल है कि कार्यसमिति को इस बार 100 के आसपास सीमित रखना है। जबकि विशेष परिस्थितियों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कार्यसमिति की संख्या 600 के लगभग पहुंच गई थी। उम्मीद की जा रही है दिल्ली में मंथन के एक सप्ताह में प्रदेश कार्यसमिति का गठन हो जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने दो माह पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने दावा किया था दो दिन कार्यसमिति घोषित कर पहली बैठक ओरछा में की जाएगी। इस दावे को पूरे दो माह हो गए हैं, लेकिन कार्यसमिति फाइनल नहीं हो पाई है। समूचे प्रदेश के नेताओं से कार्यसमिति के लिए नाम भोपाल मंगा लिए गए हैं। बताया गया है कि सबसे लंबी सूची सिंधिया की है। केंद्रीय मंत्री पूर्व मंत्री इमरती देवी, ओपीएस भदौरिया, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, मुन्नालाल गोयल वर्तमान मंत्रियों व विधायकों को समायोजित करना चाहते है। सिंधिया की सूची में 15 से अधिक नाम हैं। केंद्रीय मंत्री का तर्क है कि निगम मंडलों व प्राधिकरणों के नियुक्तियों में उनसे जुड़े लोगों के साथ न्याय नही किया गया है। उनके नाम पर केवल इसलिए विचार नहीं किया गया है कि उनको स्थान मिलने पर पार्टी के मूल कार्यकर्ता नाराज हो जाएंगे। अब यह लोग भी पार्टी के मजबूती के लिए कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रहे है।

विधानसभा अध्यक्ष की नजर

विधानसभाध्यक्ष ने प्रदेश कार्यसमिति में समायोजित करने के लिए अपनी सूची प्रदेश नेतृत्व को थमा दी है। यह सूची सिंधिया के मुकाबले कम हैं, लेकिन विधानसभाध्यक्ष से जुड़े सांसद भारत सिंह कुशवाह, शिवमंगल सिंह तोमर व संध्या राय का नाम भी जोड़ लिए जाएं तो यह संख्या सिंधिया से अधिक है। तोमर ने प्रदेश नेतृत्व तक संदेश पहुंचा दिया है कि सिंधिया के बराबर का ही प्रतिनिधित्व चाहिए। क्योंकि पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं का बाहर से आये लोगों से अधिकर अधिक है।

अब फैसला दिल्ली में होगा

प्रदेश कार्यसमिति को लेकर दिल्ली में सोमवार को मंथन चल रहा है। प्रदेश के नेता भी दिल्ली पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि वगैरह किसी को अतिरिक्त वजन दिए संगठन और चुनाव के परिदृश्य को ध्यान में रखकर प्रदेश कार्यसमिति की सूची फाइनल किया जाएगा और अंतिम फैसला भी दिल्ली में ही होगा। ताकि कार्यसमिति के जारी होने के बाद किसी तरह का विवाद सामने नहीं आए। इसके बाद ही अंचल के दोनों ध्रुव अपने-अपने समर्थकों के नामों को लेकर अड़े हुए हैं।



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