नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। घड़ी में रात 12 बजने पर जैसे ही सोमवार को नौतपा की शुरूआत हुई, वैसे ही गर्मी ने लोगों को और परेशान होने पर मजबूर कर दिया। सीजन में पहली बार रात का पारा 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। घरों में कूलर व एसी की ठंडी हवा में ही लोगों को राहत महसूस हुई। पंखे गर्म हवा फेंकते नजर आए।

वहीं दिन में नौतपा ने लोगों को खूब तपाया। दिन का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। दिन और रात के तापमान में फिलहाल उछाल दर्ज किया जाएगा। नौतपा के आने वाले दिन खूब तपेंगे।

शहर में सुबह 5:26 बजे सूर्योदय हुआ, लेकिन सूरज निकलने के साथ ही गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया। सुबह का जो समय हल्की ठंडी हवाओं के लिए जाना जाता है, उस समय तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था और साढ़े 11 बजने तक पारा 40 डिग्री तक छलांग लगा गया। दिन में गर्म हवा की तपिश से लोग परेशान होते नजर आए। दोपहर होने तक सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। ज्यादातर चार पहिया वाहन ही चलते हुए नजर आए।

स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक सोमवार को अधिकतम तापमान 0.1 डिसे की आंशिक गिरावट के साथ 44 डिसे दर्ज किया गया। यह सामान्य से 1.7 अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 3.0 डिसे की बढ़त के साथ 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 4.1 डिसे अधिक है। मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के ऊपर चक्रवाती घेरे के रूप में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। एक ट्रफ पंजाब से लेकर पाकिस्तान होते हुए उत्तर-पूर्वी अरब सागर तक सक्रिय है।

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पेड़ लगाएं… क्योंकि छांव वाली सड़कें लोगों को दे रहीं राहत

ग्वालियर में नौतपा के दौरान भीषण गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है, लेकिन शहर की कुछ सड़कें ऐसी हैं जहां छायादार पेड़ों की वजह से लोगों को राहत महसूस हो रही है। शहर के फूलबाग, एमएलबी रोड, जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर, हरिशंकरपुरम, सिटी सेंटर के कुछ हिस्सों और पुराने कैंट क्षेत्र जैसी सड़कों पर बड़ी संख्या में नीम, पीपल, बरगद और अशोक के पेड़ हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ केवल छाया ही नहीं देते, बल्कि आसपास के तापमान को नियंत्रित करने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। पेड़ों की पत्तियां सूर्य की सीधी किरणों को रोकती हैं और वातावरण में नमी बनाए रखने में मदद करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि घनी हरियाली वाले क्षेत्रों में तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक कम महसूस हो सकता है।

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धूप में नहीं, विशेष थर्मामीटर से हवा में मापा जाता है पारा

लोगों के बीच अक्सर यह भ्रांति रहती है कि तेज धूप बढ़ने पर तापमान में वृद्धि होती है और लगातार तेज धूप से ही तापमान नापा जाता है, लेकिन यह आंशिक रूप से सत्य है। मौसम विभाग द्वारा तापमान नापने के लिए सिंगल स्टीवेंसन स्क्रीन मशीन का उपयोग किया जाता है। स्टीवेंसन स्क्रीन के जरिए हवा का वास्तविक तापमान मापने के लिए थर्मामीटर को सीधी धूप, वर्षा और हवा के दबाव से बचाया जाता है।

इसके बाक्स को सफेद रंग से रंगा जाता है और इसमें जालीदार दीवारें होती हैं, जो धूप को परावर्तित करके अंदर हवा का स्वतंत्र संचार बनाए रखती हैं। स्टीवेंसन स्क्रीन के अंदर मुख्य रूप से चार थर्मामीटर लगे होते हैं, जिनकी मदद से मौसम का तापमान और नमी मापी जाती है। इसमें अधिकतम तापमान के लिए पारा (मर्करी) का इस्तेमाल किया जाता है।

जब तापमान बढ़ता है, तो पारा ऊपर चढ़ता है लेकिन कम होने पर भी अधिकतम बिंदु पर ही रुकता है। न्यूनतम तापमान मापने के लिए पारे की जगह अल्कोहल का इस्तेमाल होता है क्योंकि तापमान कम होने पर अल्कोहल इंडेक्स नीचे जाता है और सबसे ठंडे बिंदु पर स्थिर हो जाता है।



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