मध्य प्रदेश शासन के वर्ष 2020 के एक सर्कुलर के मुताबिक नगरीय निकायों को लागत से बराबर शुल्क वसूलने के अधिकार दिए गए हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 26 May 2026 08:38:45 AM (IST)Updated Date: Tue, 26 May 2026 08:40:06 AM (IST)

ग्वालियर में महंगा होगा पानी! नगर निगम की तैयारी, जल कर 389 रूपये प्रतिमाह करने और नया सीवर टैक्स लगाने का प्रस्ताव
सोशल मीडिया

HighLights

  1. जनता की जेब पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
  2. राजस्व बढ़ाने ग्वालियर नगर निगम का प्रस्ताव
  3. एमआईसी में पास होने के बाद परिषद में जाएगा प्रस्ताव

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। नगर निगम द्वारा जलकर की राशि में वृद्धि की तैयारी की जा रही है। पीएचई के अमले ने जो ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, उसके मुताबिक जलकर की दर 389 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती हैं। प्रदेश के अन्य महानगरों में भी दरें ग्वालियर से अधिक होने के कारण अधिकारी इस प्लानिंग को अमली जामा पहनाने की तैयारी में हैं। इसके अलावा अब नया सीवर टैक्स भी लगाने का प्रविधान किया जा रहा है।

119 रुपये प्रतिमाह हो सकती हैं प्राथमिक दरें

संपत्तियों के हिसाब से इसकी प्राथमिक दरें 119 रुपये प्रतिमाह हो सकती हैं। अगले सप्ताह तक मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) को प्रस्ताव भेजा जाएगा। एमआइसी की मंजूरी के बाद अंतिम निर्णय के लिए प्रस्ताव परिषद में जाएगा। परिषद में जनता पर बोझ को देखते हुए ये दरें कम भी की जा सकती हैं।

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दरअसल शहर में वर्तमान में हर नल कनेक्शन से सिर्फ 150 रुपये मासिक ही नगर निगम को प्राप्त होते हैं। इसमें भी एक लाख कनेक्शन ऐसे हैं, जो पानी का बिल जमा ही नहीं करते हैं। नतीजा यह है कि जलकर से चार गुना ज्यादा खर्चा पानी की आपूर्ति के साथ ही प्लांटों व लाइनों के संधारण में खर्च हो जाता है। शासन के वर्ष 2020 के एक सर्कुलर के मुताबिक नगरीय निकायों को लागत से बराबर शुल्क वसूलने के अधिकार दिए गए हैं।

ऐसे में जलकर बढ़ाने की कवायद निगम के अधिकारियों ने की, तो उसमें लागत के अनुपात में वसूली के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह तक जलकर करना पड़ रहा था लेकिन इससे विरोध होने और टैक्स न मिलने की संभावना है ऐसे में निगमायुक्त संघ प्रिय ने निर्देश दिए कि जलकर उस अनुपात में बढ़ाया जाए, जितना लोगों को देने में भी आसानी हो और निगम पर भी आर्थिक बोझ न पड़े। वहीं अब सीवर संधारण व्यवस्था भी नगर निगम के अंडर में आ चुकी है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन भुगतान और मशीनों की खरीद के लिए आय बढ़ाने की जरूरत है।

संपत्ति के हिसाब से लेंगे शुल्क

जलकर बढ़ाने से पहले की गई गणना में हाउस होल्ड के हिसाब से टैक्स तय किया जा रहा था। हाउस होल्ड की संख्या 2.68 लाख ही थी। इससे टैक्स का स्लैब ज्यादा बढ़ रहा था। ऐसे में संपत्तियों के आधार पर टैक्स की गणना की गई। शहर में संपत्तियां 3.40 लाख निकलकर आईं। इनमें प्लाट आदि भी शामिल थे। ऐसे में पानी की आपूर्ति की लागत के लिए 389 रुपये का शुल्क तय किया गया है। इससे सालभर में 158 करोड़ रुपये के जलकर की वसूली का गणित निकला है।

वर्तमान में पानी की सप्लाई में नगर निगम का ज्यादा खर्चा होता है, जबकि टैक्स कम मिलता है। शासन के सर्कुलर के अनुसार खर्च के बराबर जलकर मिलना चाहिए। ऐसे में दरों में वृद्धि की संभावना देखी जा रही है। जल्द ही दरें फाइनल कर एमआइसी को भेजी जाएंगी।- संघ प्रिय, आयुक्त नगर निगम



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