शेल्टर परिसर में पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए कई विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। …और पढ़ें

HighLights
- पिपरोली के ग्वाला नगर में बनेगा शेल्टर होम।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई।
- पकड़े गए कुत्तों की पहले होगी ग्रूमिंग और मेडिकल टेस्ट।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती संख्या और इसका लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े दिशा निर्देशों के पालन में ग्वालियर नगर निगम ने इस समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिपरोली स्थित ग्वाला नगर की जमीन पर प्रस्तावित डाग शेल्टर (कुत्तों के आश्रय स्थल) के निर्माण की प्रक्रिया को परिषद से मंजूरी मिलने के बाद तेज कर दिया गया है।
आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस
यह आश्रय स्थल आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और इसमें एक समय में करीब 1500 कुत्तों को रखने की क्षमता विकसित की जाएगी। आश्रय स्थल का निर्माण एक करोड़ 71 लाख रुपये की राशि से किया जाएगा, जिसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अलग-अलग पांच कैनल बनेंगे
शेल्टर में आवारा कुत्तों के लिए अलग-अलग पांच कैनल (आवासीय इकाइयां) तैयार की जाएंगी। शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए कुत्तों को सबसे पहले यहां लाकर क्वारंटाइन एरिया में रखा जाएगा, ताकि उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके और किसी प्रकार के संक्रमण या बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद कुत्तों की ग्रूमिंग की जाएगी और पशु चिकित्सकों द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उपचार, टीकाकरण और अन्य चिकित्सकीय सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद उन्हें स्थायी रूप से कैनल में स्थानांतरित किया जाएगा।
आवारा कुत्तों पर लगेगी लगाम
शेल्टर परिसर में पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए कई विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गर्मी के मौसम में कुत्तों को राहत देने के लिए तालाब और जल स्रोत भी बनाए जाएंगे, जहां वे पानी में रहकर तापमान से बचाव कर सकें। इसके अलावा पर्याप्त छायादार क्षेत्र, स्वच्छ पेयजल और भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। नगर निगम के सहायक नोडल एबीसी गौरव परिहार के मुताबिक इस परियोजना के शुरू होने से शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही पशुओं को सुरक्षित वातावरण और बेहतर देखभाल उपलब्ध हो सकेगी, जिससे मानव और पशु दोनों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
