महिदपुर तहसील की अदालत ने डेढ़ लाख रुपये के कर्ज से बचने के लिए दोस्त की निर्मम हत्या करने वाले दो आरोपियों को दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कुल 13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश सनोड़िया ने बलराम उर्फ बल्लू परिहार (24) निवासी खेड़ाखजुरिया और सुनील परमार (25) निवासी ढाबलीकम्मा को धारा 302 में आजीवन सश्रम कारावास की सजा दी। बलराम को धारा 201 और आर्म्स एक्ट में 7 साल अतिरिक्त सजा व 7 हजार जुर्माना, जबकि सुनील को धारा 201 में 5 साल अतिरिक्त सजा व 6 हजार जुर्माना हुआ। अपराध में शामिल नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया।
मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि आरोपी सुनील ने मृतक नरेन्द्र सौधिया राजपूत (22) से डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे। पैसा न लौटाना पड़े इसलिए सुनील ने बलराम और एक नाबालिग को पैसे का लालच देकर हत्या की साजिश रची। 7 अगस्त 2023 को सुनील ने नरेन्द्र को पैसे देने के बहाने उज्जैन से खेड़ाखजुरिया बुलाया। तीनों आरोपी उसे अनाज मंडी के पीछे ले गए। वहां बलराम ने पीछे से तलवार मारी। नरेन्द्र चिल्लाया तो मुंह दबा दिया। इसके बाद तीनों उसे घसीटकर डबरी के पास ले गए और पानी में डुबोकर मार डाला। हत्या के बाद तलवार और मृतक का मोबाइल तोड़कर पानी में फेंक दिया। हत्या के बाद तीनों आरोपी कानाखेडी, डोंगला होते हुए ढाबलीकम्मा पहुंचे। वहां कपड़े बदलकर मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकालकर खून से सने कपड़े जलाने की कोशिश की, लेकिन कपड़े गीले होने से पूरी तरह नहीं जले। 8 अगस्त को बलराम डबरी पर लाश देखने गया। नरेन्द्र का सिर पानी के ऊपर आ गया था। उसने शव को पत्थर से बांधकर फिर डुबो दिया। 9 अगस्त को तीनों महिदपुर से दो बोरे लाए। रात में लाश पानी से निकालकर बोरे में भरी और मोटरसाइकिल से मैलानिया-पानबिहार रोड स्थित महुडी गांव के कुएं के पास खेत में फेंक दिया।
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ऐसे खुला राज
15 अगस्त 2023 को खेत मालिक अंतर सिंह ने पुलिस को बोरे में सड़ी-गली लाश मिलने की सूचना दी। शासन ने केस को जघन्य और सनसनीखेज मानकर SIT गठित की। आईपीएस कृष्णलाल चंदानी और उप निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह अलावे ने टॉवर लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर 19 अगस्त को तीनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कबूल लिया। उनकी निशानदेही पर जले कपड़े, तलवार और टूटा मोबाइल बरामद हुआ। नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है।
CDR बनी अहम कड़ी
विशेष लोक अभियोजक कमलसिंह गोयल ने कोर्ट में मोबाइल की कॉल डिटेल, टॉवर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य मजबूती से रखे। इन्हीं सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। प्रभारी उप निदेशक अभियोजन राजेन्द्र कुमार खाण्डेगर के मार्गदर्शन में पैरवी की गई।
