नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर अंचल का सैंडस्टोन अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। प्राकृतिक सुंदरता, मजबूती और टिकाऊपन के कारण यह पत्थर यूरोप और खाड़ी देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत मिली नई पहचान ने सैंडस्टोन उद्योग को नई गति दी है। हर वर्ष ग्वालियर से हजारों टन सैंडस्टोन और उससे बने उत्पाद विदेशों में निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय उद्योग, कारीगरों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल रहा है।

यूरोप और खाड़ी देशों में बढ़ी मांग

ग्वालियर की खदानों से निकला सैंडस्टोन अब इंग्लैंड, इटली, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर समेत कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के अनुसार जिले से प्रतिवर्ष लगभग 68 हजार टन सैंडस्टोन विभिन्न देशों में भेजा जाता है। इससे करीब 56 करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात कारोबार हो रहा है।

स्टोन पार्क बना उद्योग का केंद्र

ग्वालियर के स्टोन पार्क में लगभग 50 इकाइयां संचालित हैं, जहां सैंडस्टोन की कटिंग, ग्राइंडिंग, फिनिशिंग और पॉलिशिंग का कार्य किया जाता है। इसके अलावा जिले में 25 अन्य इकाइयां भी सक्रिय हैं, जहां पारंपरिक शिल्पकार पत्थरों को कलात्मक रूप देकर आकर्षक उत्पाद तैयार करते हैं। इन इकाइयों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं।

सैंडस्टोन से बन रहे आकर्षक उत्पाद

ग्वालियर लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाली सैंडस्टोन टाइल्स के लिए प्रसिद्ध रहा है। इसके अलावा यहां के कारीगर जाली पैनल, कलात्मक मूर्तियां, वास्तुकीय संरचनाएं, स्टोन क्राफ्ट, पैविंग ब्लॉक और सजावटी हस्तशिल्प वस्तुएं तैयार करते हैं। प्राकृतिक बनावट और उत्कृष्ट डिजाइन के कारण इन उत्पादों की देश-विदेश में मांग लगातार बढ़ रही है।

शिल्पियों को मिल रहा सरकारी सहयोग

प्रदेश सरकार और एमपीआईडीसी सैंडस्टोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। निर्यात को प्रोत्साहित करने के साथ शिल्पकारों को प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्वालियर के 150 पत्थर शिल्पी भारत सरकार में पंजीकृत हैं, जिनमें 100 पुरुष और 50 महिलाएं शामिल हैं। कई शिल्पकार राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।

आर्थिक विकास का मजबूत माध्यम

विशेषज्ञों का मानना है कि सैंडस्टोन उद्योग ग्वालियर की पहचान के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है। बढ़ते निर्यात और वैश्विक मांग के कारण आने वाले वर्षों में इस उद्योग के और विस्तार की संभावनाएं हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और राजस्व दोनों में वृद्धि होगी।



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