ग्वालियर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की कैंटीन में टेंडर और फर्नीचर गड़बड़ी मामले की जांच तेज हो गई है। डीएमई टीम को निरीक्षण के दौरान स्वच्छता और व्यवस् …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 18 May 2026 08:24:43 AM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 08:24:43 AM (IST)

ग्वालियर का बदहाल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, टीम को जांच में कैंटीन में मिली खराब गोभी और पहले से गूंथा आटा
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाली। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. डीएमई टीम ने अस्पताल कैंटीन में पहुंचकर जांच शुरू की।
  2. कैंटीन कर्मचारियों ने निरीक्षण के दौरान दरवाजे खोलने में देरी की।
  3. रसोई में खराब गोभी और पुराना गूंथा आटा मिला।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की छठवीं मंजिल पर संचालित कैंटीन के टेंडर से लेकर फर्नीचर में हुई गड़बड़ियों का मामला अब चिकित्सा शिक्षा विभाग तक भी पहुंच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल स्थित संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) कार्यालय की एक तीन सदस्यीय टीम इस मामले को खंगालने पहुंची।

डीएमई के वित्तीय सलाहकार (एडीएफ) महक सिंह के नेतृत्व में टीम ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचकर कैंटीन का निरीक्षण किया, लेकिन इस पूरी जांच प्रक्रिया में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जिन अधिकारी पर इस गड़बड़ी के सीधे आरोप हैं, वे ही निरीक्षण में शामिल होते नजर आए।

निरीक्षण के लिए पहुंची टीम को अस्पताल की इस विवादित कैंटीन की कड़वी हकीकत का सामना करना पड़ा। जब टीम कैंटीन पहुंची तो कर्मचारियों ने काफी देर तक दरवाजे नहीं खोले। इस पर वित्तीय सलाहकार सिंह ने नाराजगी जताते हुए कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। टीम को कैंटीन की रसोई में खराब हो चुकी गोभी और पहले से गूंथ कर रखा हुआ आटा मिला, जिससे साफ है कि यहां स्वच्छता मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

अधीक्षक को चाबी तक नहीं नसीब

  • हद तो तब हो गई जब टीम ने कैंटीन के वाशरूम को खोलने के लिए कहा। कर्मचारियों ने वाशरूम की चाबी देने से साफ मना कर दिया। निरीक्षण के दौरान गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ और अस्पताल की प्रभारी अधीक्षक डॉ. नीलिमा टंडन भी टीम के साथ मौजूद थीं।
  • वाशरूम का ताला न खुलने और कर्मचारियों के अड़ियल रवैये को देख भोपाल से आए अधिकारियों का पारा चढ़ गया। टीम ने प्रभारी अधीक्षक डॉ. टंडन से कहा आप इस अस्पताल की अधीक्षक हैं और इस कैंटीन के कर्मचारी आपको ही चाबी नहीं दे रहे हैं, यह कैसी व्यवस्था है।
  • लोकायुक्त और कमिश्नर 
स्तर पर भी जांच

    छठवीं मंजिल पर बनी यह कैंटीन शुरुआत से ही आरोपों के साये में है। टेंडर प्रक्रिया की शर्तों में फेरबदल से लेकर फर्नीचर की शिकायतों का एक लंबा पुलिंदा है। लोकायुक्त भोपाल ने इस पूरे मामले में गड़बड़ी का संज्ञान लेते हुए बाकायदा जांच प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है और जांच भी शुरू कर दी है। दूसरी ओर संभागायुक्त के पत्र के बाद अब स्थानीय जिला प्रशासन भी अपने स्तर पर इस घोटाले की जांच करने की तैयारी में है। चिकित्सा शिक्षा विभाग और लोकायुक्त के शिकंजे के बाद अब अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है।



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