लोक शिक्षण विभाग ने नया आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत ‘हमारे शिक्षक’ एप पर ही शिक्षकों सहित लिपिक वर्गीय कर्मचारियों व अन्य अमले को दैनिक उपस्थिति व …और पढ़ें

HighLights
- शिक्षकों के बाद अब दफ्तरों पर भी हमारे शिक्षक ऐप का पहरा
- बाबू और अफसरों की हाजिरी भी होगी ऑनलाइन
- शिक्षकों के बाद अब अफसरों के लिए भी ई-अटेंडेंस अनिवार्य
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश सहित जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडस एक जुलाई से लगाना अनिवार्य किया गया था। ऑनलाइन एप पर ऑनलाइन उपस्थिति न लगाने वाले शिक्षकों के वेतन काटने के निर्देश लोक शिक्षण विभाग ने जारी किए थे। लेकिन 22 जून को लोक शिक्षण विभाग ने इस संबंध में नया आदेश जारी किया और शिक्षा विभाग के शिक्षकों के साथ अन्य सभी कर्मचारियों व अफसरों के लिए ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य कर दिया। अब हमारे शिक्षक एप पर ही शिक्षकों सहित लिपिक वर्गीय कर्मचारियों व अन्य अमले को दैनिक उपस्थिति व अवकाश दर्ज कराना होगा।
इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य शिक्षा केंद्र ने संयुक्त रूप से आदेश जारी किया गया है। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह और संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह के हस्ताक्षरों से जारी इस आदेश के तहत अब विभाग के किसी भी स्तर के अमले को ऑफलाइन या रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराने की छूट नहीं मिलेगी।
ग्वालियर में व्यापक स्तर पर होगा बदलाव
इस नए आदेश का व्यापक असर ग्वालियर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों, संकुल केंद्रों, शासकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान और स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले अन्य सभी दफ्तरों पर पड़ने वाला है। इससे पहले जून 2025 में जारी निर्देशों के तहत केवल शिक्षकों के लिए इस ऐप के माध्यम से ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया गया था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर शत-प्रतिशत शासकीय अमले पर लागू कर दिया गया है।
कार्यालय प्रमुखों को सौंपी जिम्मेदारी, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के अनुसार, जिले के सभी संबंधित कार्यालय प्रमुखों और प्रशिक्षण संस्थान के प्रमुखों को यह व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके अधीन काम करने वाला प्रत्येक लोकसेवक यानि कर्मचारी व अधिकारी हमारे शिक्षक प्रणाली पर आनबोर्ड (पंजीकृत) हो जाए। एक जुलाई से सभी कर्मचारियों की उपस्थिति और अवकाश का लेखा-जोखा केवल इसी ऐप के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी इस प्रणाली पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उसे अनुपस्थित माना जा सकता है।
शिक्षकों के साथ अब अन्य कर्मचारियों में भी हुई हलचल
इस आदेश के बाद से जिले के शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों में भी हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से दफ्तरों में लेटलतीफी और बिना सूचना के गायब रहने वाले कर्मचारियों पर लगाम कसी जा सकेगी। पूरी प्रणाली ऑनलाइन होने से अवकाश की स्वीकृतियां भी पारदर्शी होंगी और मैन्युअल रिकॉर्ड रखने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
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क्या कहते हैं शिक्षक नेता
एप से हाजिरी लगाने में न तो शिक्षकों को परेशानी है और न ही अन्य कर्मचारियों को होगी। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के कई स्कूलों में नेटवर्क की समस्या है। साथ ही एप भी सटीक लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाता। इससे शिक्षकों को ई-अटेंडेंस लगाने में दिक्कत होती है। कभी कभी तो एप चेहरे का मिलान नहीं करता। कभी कभी स्कूल में होने के बाद भी लोकेशन काफी दूर की बताता है। ऐसे में ई-अटेंडेंस नहीं लग पाती। विभाग को पहले एप की तकनीकी खामियां सुधारनी चाहिए। साथ जहां पर नेटवर्क समस्या है, वहां के शिक्षकों को छूट देनी चाहिए। अरविंद दीक्षित, प्रदेश सचिव, मध्यप्रदेश शिक्षक संघ।
विभाग ने ई-अटेंडेंस के आदेश में संशोधन कर अब शिक्षकों के साथ विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए एप पर उपस्थिति लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में सभी को निर्देश दे दिए गए हैं। यदि किसी को नेटवर्क या एप को लेकर कोई समस्या है, तो कार्यालय में आटी प्रभारी से मिलकर समस्या हल करवा सकता है। हरिओम चतुर्वेदी, सहायक संचालक, शिक्षा, ग्वालियर।
