नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल इस समय मानों आग की भट्टी की तरह तप रहा है। सूर्य देव के तीखे तेवर और आसमान से बरसती आग ने अंचलवासियों का जीना मुहाल कर दिया है।
स्थिति यह है कि अभी तक तो सिर्फ दोपहर की चिलचिलाती धूप और गर्म हवा के थपेड़े (लू) लोगों को परेशान कर रहे थे, लेकिन अब रात के तापमान में भी तेजी से उछाल आने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अब रातें भी उतनी ही गर्म होने वाली हैं, जितनी दोपहर। मौसम विज्ञान केंद्र ने ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के लिए आगामी 24 मई तक भीषण गर्मी और गंभीर हीटवेव का आरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले 72 घंटों तक इस भीषण गर्मी से राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
पारा 43.3 डिग्री पर, रातें भी हुईं बेचैन: पिछले 24 घंटों के दौरान दिन के अधिकतम तापमान में मामूली लगभग एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन हवा में नमी की कमी और तपिश के कारण जमीनी हकीकत में कोई बदलाव महसूस नहीं हो रहा है। दिन का पारा 43.3 डिसे पर बना हुआ है। चिंता यह है कि न्यूनतम तापमान यानि रात का पारा भी अब 30 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने वाला है।
क्यों होता है ग्वालियर अधिक गर्म
ग्वालियर शहर का भौगोलिक ढांचा ऐसा है कि यह चारों तरफ से पथरीली पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह राक कैविटी इफेक्ट पैदा करता है, जिससे दिनभर की धूप को यह पहाड़ियां सोख लेती हैं और रात में उस गर्मी को वापस वातावरण में छोड़ती हैं। यही कारण है कि ग्वालियर देश के सबसे गर्म शहरों की सूची में अक्सर टाप पर रहता है।
हीटवेव बढ़ा रही मरीजों की संख्या
दिन में चल रही उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवा (लू) लोगों को न सिर्फ परेशान कर रही हैं, बल्कि बीमार भी बना रही हैं। जयारोग्य अस्पताल और जिला अस्पताल की ओपीडी में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और तेज बुखार के मरीजों की संख्या में 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। डाक्टरों का कहना है कि इस मौसम में शरीर में पानी की कमी होना सबसे खतरनाक है। दोपहर के समय ठंडे पेय पदार्थों जैसे आम पना, छाछ, नींबू पानी का सेवन करें और बिना काम के धूप में निकलने से बचें।
सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक शहर की मुख्य सड़कें जैसे महाराज बाड़ा, थाटीपुर, और लश्कर के प्रमुख बाजार पूरी तरह सूने नजर आ रहे हैं। लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही पूरे चेहरे व कान आदि को ढककर बाहर निकल रहे हैं।
मौसम का गणित: जब रात का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री अधिक हो जाता है, तो कंक्रीट के मकान और सड़कें रात में भी ठंडी नहीं हो पातीं। यही वजह है कि कूलर और पंखे भी अब रात में उबलती हुई गर्म हवा फेंक रहे हैं, जिससे लोग पूरी रात करवटें बदलने को मजबूर हैं।
