राजधानी के हाईप्रोफाइल त्विषा शर्मा केस में सोमवार को बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी सोमवार दोपहर करीब 12 बजे त्विषा शर्मा की सास व सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और त्विषा के पति व अधिवक्ता समर्थ सिंह को लेकर बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित उनके घर पहुंचे। सबसे पहले दिल्ली से आई सीबीआई की फॉरेंसिक टीम दो अलग-अलग पुतले लेकर गिरिबाला सिंह के घर पहुंची। इसके बाद समर्थ सिंह को टीम लेकर आई। दस मिनट बाद गिरिबाला सिंह को लेकर सीबीआई की अन्य टीम लेकर मौके पर पहुंची। घर पहुंचने से पहले ही कटारा हिल्स थाने की पुलिस घर के बाहर बेरिकेडिंग्स लगाकर सुरक्षा कड़ी कर दी थी। 

दोनों को लेकर सीबीआई के अधिकारी घर के छत पर बने उस एंगल के पास ले गए, जहां त्विषा शर्मा कथित तौर पर फंदे पर लटकी हुई मिली थी। त्विषा का वजन करीब 80 किलो बताया गया। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भी उसका वजन 80 किलो के करीब आया। इस आधार पर सीबीआई की टीम 80 किलो वजनी डमी शव लेकर मौके पर पहुंची थी। डमी शव को समर्थ द्वारा बताए गए एंगल पर सीबीआई के अधिकारियों ने उसी स्थान पर फंदे से लटकाया। इसके बाद गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने भोपाल पुलिस, सीबीआई को बयान में घटनाक्रम बताया था, उसी आधार पर री-क्रिएशन कराया गया। 

ये भी पढ़ें- 80 किलो की डमी खोलेगी त्विषा की मौत का राज! क्राइम सीन री-क्रिएट करने पहुंची CBI

 




Twisha Sharma Case Re-creation: Giribala-Samarth presented Twisha's 80 kg dummy body in front of CBI.

त्विषा की सास और पति से सीबीआई ने पूछताछ की।
– फोटो : अमर उजाला


समर्थ ने फंदे से उतारा, गिरिबाला ने फंदा खोला

पुलिस और सीबीआई की रिमांड के दौरान गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने बताया कि किसने फंदे से उतारा, किसने फंदा खोला। इसी आधार पर समर्थ सिंह से सीबीआई की टीम ने त्विषा के डमी शव को फंदे से नीचे उतरवाया और गिरिबाला सिंह ने गले में लटका फंदा खुलवाया। इस दौरान उनके साथ समर्थ का मौसेरा भाई भी मौजूद था, उसकी उपस्थिति को लेकर भी घटनाक्रम दोहराया गया। क्या मदद ली गई थी, वह भी यहां रूपांतरण में दर्शाया गया। डमी का वजन त्विषा के 80 किलो वजन के बराबर करने के लिए डमी के अंदर रेत भरी गई। दोनों पैरों में पत्थर लटकाकर वजन बराबर किया गया। वजन करने के लिए सीबीआई इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा लेकर घटना स्थल पर पहुंची थी।

नौकर से भी पूछताछ

सीबीआई करीब चार घंटे तक गिरिबाला सिंह के घर रही और चार बजे सभी टीमें गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर निकलीं। री-क्रिएशन में टीम को करीब दो घंटे का समय लगा। इसके बाद गिरिबाला, समर्थ, स्वराज सिंह और घरेलू नौकर से उस दिन के घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पूछताछ की गई। बाद में सभी के बयानों का मिलान किया गया। इन लोगों के बयानों में आज भी विरोधाभास रहा है। इधर समर्थ के बड़े भाई सिद्धार्थ सिंह ने सोमवार सुबह सीबीआई कार्यालय पहुंचकर मां और भाई से सीबीआई के अधिकारियों की मौजूदगी में मुलाकात की है। 

 

ये भी पढ़ें- ‘घटना वाली रात 9:40 से 10:20 के बीच क्या हुआ?’ CBI को स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे गिरिबाला व समर्थ

 


Twisha Sharma Case Re-creation: Giribala-Samarth presented Twisha's 80 kg dummy body in front of CBI.

त्विषा शर्मा केस का री क्रिएशन के दौरान गिरिबाला सिंह के घर बाहर तैनात पुलिसकर्मी
– फोटो : अमर उजाला


चोट को लेकर अभी भी असमंजस

समर्थ सिंह ने भोपाल पुलिस और सीबीआई की रिमांड के दौरान अपने बयान में कहा है कि उसने त्विषा से कोई मारपीट नहीं की थी। त्विषा के शरीर पर जो भी चोटें लगी हैं या मेडिकल रिपोर्ट में आई हैं, वह त्विषा को फंदे से उतारने के दौरान लगी होंगी। क्योंकि उस समय 80 किलो वजनी अचेत लड़की को संभालना मुश्किल हो रहा था। जल्दी भी थी कि अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि उसकी जान संभव हो तो बचाया जा सके। सीबीआई के अधिकारी फंदे के करीब 40 मिनट के री-क्रिएशन के दौरान चोट वाले प्वाइंट पर अधिक फोकस किए रहे। क्योंकि घटना का सामान्य रीक्रिएशन एक बार भोपाल पुलिस और एक बार रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ सिंह को लेकर करा चुकी है। सोमवार को किया गया रीक्रिएशन गिरिबाला सिंह के साथ फाइनल रीक्रिएशन था। सीबीआई के अधिकारी इस रीक्रिएशन के बाद भी नहीं समझ पा रहे हैं कि वहां ऐसी कोई वस्तु नहीं थे, कोई बाहरी व्यक्ति भी नहीं थे और जिस तरह से मां-बेटे और एक रिश्ततेदार युवक के साथ त्विषा को फंदे से उतारने के बाद घर के बाहर तक लाने का घटनाक्रम बताया, उस दौरान चोट कैसे लगी, शरीर में आधा दर्जन चोटें त्विषा के कब लगीं। यह सीबीआई के अधिकारी अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं। 

समर्थ के मौसेरे भाई व घरेलू नौकर भी आज रहे मौजूद

12 मई की रात सीबीआई की टीम ने त्विषा शर्मा का शव फंदे से जब नीचे उतारा था तो तीन युवक सीसीटीवी में दिख रहे थे। समर्थ सिंह के अलावा स्वराज सिंह बघेल और घरेलू नौकर को पहले ही गिरिबाला सिंह के घर बुला लिया था। दोनों ने समर्थ को त्विषा का शव फंदे से नीचे उतारने में मदद की थी। स्वराज सिंह बघेल समर्थ सिंह के मौसी के बेटे हैं और उनके पड़ोस में ही रहते हैं। स्वराज सिंह बघेल की मां डॉक्टर हैं। स्वराज सिंह और घरेलू नौकर से भोपाल पुलिस की एसआईटी के साथ सीबीआई पहले भी पूछताछ कर चुकी है।

 

ये भी पढ़ें-  ‘खुद को निर्दोष मानती हैं तो समर्थ को फरार क्यों कराया?’, सीबीआई का सास गिरिबाला सिंह से सवाल

 


Twisha Sharma Case Re-creation: Giribala-Samarth presented Twisha's 80 kg dummy body in front of CBI.

त्विषा शर्मा
– फोटो : अमर उजाला


शरीर पर चोट का नहीं मिला स्पष्ट जवाब

घटना के पूरे रिक्रिएशन के दौरान सीबीआई के अधिकारियों को यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि त्विषा के शरीर में जो आधा दर्जन चोटें पीएम रिपोर्ट में आई हैं, वह किस दौरान लगीं। इसको लेकर समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह से आज एक बार फिर पूछताछ की गई, लेकिन चोट लगने के कारणों का स्पष्ट जवाब कोई नहीं दे सका। चोट कहीं पर लगी है और बॉडी फंदे से उतरते समय किसी और झुकी री-क्रिएशन में बताई गई। ऐसे में सीबीआई की फॉरेंसिक टीम के साथ जांच टीम त्विषा शर्मा के शरीर पर चोट के तहत तक पहुंचने के लिए नए सिरे से सभी से पूछताछ कर रही है। 

सीबीआई ने डॉक्टर से की पूछताछ, कल फिर मांग सकती है दोनों का तीन दिन का रिमांड

सीबीआई ने समर्थ सिंह और त्विषा शर्मा का इलाज करने वाले उस डॉक्टर से भी आज पूछताछ की है, जिसका नाम समर्थ सिंह ने सीबीआई को बताया था। समर्थ ने बताया था कि डॉक्टर के कहने पर त्विषा का गर्भपात कराया गया। इसके पहले समर्थ ने कहा था कि त्विषा ने बिना जानकारी दिए गर्भपात करा दिया था। यहां भी विरोधाभासी बयान सामने आया है। त्विषा शर्मा की मौत के मामले में दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की सीबीआई रिमांड 2 जून को समाप्त हो रही है। सीबीआई को कई बिंदुओं पर दोनों ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। ऐसे में सीबीआई गिरिबाला सिंह और समर्थ का तीन-तीन दिन के लिए कोर्ट से दोबारा रिमांड मांग सकती है। 

एसआई दिनेश शर्मा की कार में दो दिन रखा था लिगेचर

त्विषा जिस जिम्नास्टिक बेल्ट से फंदे पर लटकी थी, उसे कटारा हिल्स पुलिस ने तीन दिन बाद जब्त किया था। सीबीआई ने थाना पुलिस से जब इस संबंध में जानकारी चाही तो पता चला कि जांच टीम में शामिल रहे थाने के उप निरीक्षक दिनेश शर्मा घटना स्थल से उठाकर लाए थे, लेकिन दो दिन तक उसे अपनी कार में रखे रहे। त्विषा शर्मा के परिजनों ने जब पुलिस से सवाल किया कि हत्या और आत्महत्या बताने वाले लिगेचर (फंदे) को पुलिस ने जब्त नहीं किया, तब उसे एम्स में मेडिकल के लिए दिया गया था। सीबीआई एसआई दिनेश शर्मा के बयान भी दर्ज कर सकती है कि उससे भूल हुई या आरोपियों को बचाने का षड्यंत्र था।

 




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *