मध्यप्रदेश ने समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन में देशभर में नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 10 हजार किसानों से गेहूं खरीदा जा चुका है, जो देश में सबसे अधिक है। वहीं करीब 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद के साथ मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश में गेहूं खरीदी का कार्य अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि कोविड काल को छोड़कर पिछले 10 वर्षों में इस बार समर्थन मूल्य पर सबसे ज्यादा गेहूं खरीदा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है।

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मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया। मुख्यमंत्री खुद गेहूं खरीदी व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने कई खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर किसानों से बातचीत भी की और वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिन किसानों ने स्लॉट बुक करा लिए हैं, उनके लिए गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी है। 

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प्रदेश सरकार द्वारा अब तक किसानों को 20,680 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। किसानों से 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है, जिसमें 2585 रुपये समर्थन मूल्य और 40 रुपये बोनस शामिल है। खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी प्रयास किए गए हैं। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। तौल पर्ची बनाने का समय रात 10 बजे तक और भुगतान प्रक्रिया रात 12 बजे तक बढ़ाई गई है। खरीदी सप्ताह में छह दिन की जा रही है। इसके अलावा केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, बारदाना, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और गुणवत्ता जांच उपकरण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।



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