इंदौर में बीते 8 साल में सबसे ज्याद जलसंकट का सामना रहवासी कर रहे हैं। निगम के अफसर की ड्यूटी जल वितरण में लगाई गई है और अब साथ में निगम को स्वच्छता रैंकिंग की चिंता भी सता रही है क्योंकि कई शहरों में सफाई पर रखने के लिए टीम आ चुकी है। पिछले साल इंदौर स्वच्छता की प्रीमियर लीग में शामिल था और पुरस्कार भी मिला था। इंदौर सूरत सहित जो शहर इस लीग में शामिल है यदि इस बार उन्हें पिछले साल की तुलना में कम नंबर हासिल होते हैं तो वह प्रीमियर लीग से बाहर हो जाएंगे।
इंदौर अपना स्थान बरकरार रखना चाहता है इसलिए शहर में तैयारी की जा रही है। सड़कों के डिवाइडर पेंट किए गए हैं।इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों की भी सफाई की गई है। इस बार नगर निगम की जिम्मेदारी देपालपुर को भी साफ करना है। जल संकट से जूझ रहे शहर के अफसर देपालपुर में भी ड्यूटी देने जा रहे हैं। इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण शनिवार से शुरू हो चुका है जो 31 मई तक जारी रहेगा। उधर शहर के डेढ़ सौ से ज्यादा इलाकों में जलसंकट है और लोग प्रदर्शन भी करने लगे है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के नियमों में बदलाव किया गया है।कुल 12,500 अंक निर्धारित किए गए हैं। रैंकिंग सुधारने के लिए शहरों को कचरा प्रबंधन को और बेहतर बनाना होगा। केवल कचरा उठाने से ही नगर निगमों की रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि सार्वजनिक स्थानों और सरकारी कार्यालयों की दीवारों पर पान-गुटखा के दाग और पर्यटन स्थलों की गंदगी भी अंक घटा सकती है।
नागरिकों द्वारा दिए गए फीडबैक में इंदौर की स्थिति बेहतर है, लेकिन जलसंकट के कारण सफाई के कामों पर भी ठीक से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आपको बता दे कि इंदौर आठ बार से स्वच्छता की रैंकिंग में पहले स्थान पर रहा है और पिछले साल स्वच्छता प्रीमियर लीग में भी पुरस्कार पा चुका है। इस बार इंदौर का मुकाबला सुरत, नवी मुंबई, अहमदाबाद जैसे शहरों से है। ये शहर प्रीमियर लीग में शामिल है।
