धार भोजशाला को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और गुरुवार रात साढ़े आठ बजे सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है, लेकिन शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई नहीं हुई। उधर, भोजशाला मामले को लेकर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से कैविएट दायर की गई है और कहा गया है कि उनका पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट सुने।
कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद का कहना है कि पहले एएसआई परिसर को कमाल मौला मस्जिद बताता आया है, लेकिन अब रिपोर्ट में मंदिर बताया गया। भोजशाला में किए गए एएसआई के सर्वे को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में भी यह बात रखी गई थी, लेकिन फैसला उनके पक्ष में नहीं आया। अब वे सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।
समद ने कहा कि मस्जिद परिसर में 700 वर्षों से जुमे की नमाज अदा की जा रही है। हम संविधान के दायरे में रहकर ही काम करेंगे। हमारे पास मस्जिद को लेकर मजबूत कानूनी साक्ष्य हैं, जिन्हें हम सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे। सरकारी रिकॉर्ड और धार रियासत के दस्तावेजों में जमीन मस्जिद के नाम से दर्ज है। सरकारी खसरे में भी इसका उल्लेख है।
अब हम लंदन से प्रतिमा लाएंगे
भोजशाला का केस हाईकोर्ट में दायर करने वाले याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि हमारा लक्ष्य लंदन संग्रहालय से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाना है। इसके लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने विभिन्न मंत्रालयों से पत्राचार शुरू कर दिया है। पूर्व में भी इसे लेकर ब्रिटिश सरकार से चर्चा हो चुकी थी। उनका कहना है कि जल्द ही प्रतिमा अपने मूल स्थान पर स्थापित होगी।गोयल ने शुक्रवार को भोजशाला मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की।
