राजधानी के जयप्रकाश चिकित्सालय (जेपी अस्पताल) में 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के श्रेणीकरण को लेकर विवाद सामने आया है। मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा अर्धकुशल माने गए कर्मचारियों को अब अकुशल श्रेणी में रखा जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

2010 से अस्पताल में दे रहे सेवाएं

संघ के अनुसार विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत कई कर्मचारी वर्ष 2010 से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इनमें वार्ड बॉय, वार्ड आया, सफाईकर्मी और सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। कर्मचारी पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा कर्मचारी थे और बाद में आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से सेवाएं देते रहे।

एनएचएम के आदेश का हवाला

कर्मचारी संगठन का कहना है कि 13 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी आदेश में इन कर्मचारियों को अर्धकुशल श्रेणी में माना गया था। इसके बावजूद अब उन्हें अकुशल श्रेणी में रखने का निर्णय लिया गया है। संगठन ने इसे श्रम विभाग और एनएचएम के निर्देशों की अनदेखी बताया है। मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अस्पताल में डेढ़ दशक से अधिक समय तक सेवाएं दी हैं, उन्हें अकुशल श्रेणी में रखना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने आदेश वापस लेने की मांग की है।

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अधीक्षक बोले- श्रम विभाग का यही नियम

विवाद के बीच जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने आदेश को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के नियमों के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारी अकुशल श्रेणी में ही आते हैं और उसी आधार पर आदेश जारी किया गया है।

डॉ. जैन ने कहा, आदेश पूरी तरह सही है। श्रम विभाग का जो रूल है, उसमें आउटसोर्स कर्मचारी अकुशल श्रेणी में ही आते हैं। जहां तक एनएचएम का सवाल है, कई बार वहां बिना विस्तृत परीक्षण के सीधे प्रारूप जारी कर दिए जाते हैं, जिससे इस तरह की त्रुटियां हो जाती हैं। मैंने श्रम विभाग के नियमों के अनुसार ही आदेश जारी किया है।

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दो पक्ष, दो दावे

मामले में अब कर्मचारी संगठन और अस्पताल प्रबंधन के तर्क अलग-अलग हैं। कर्मचारी एनएचएम के पुराने आदेश को आधार बनाकर अर्धकुशल श्रेणी बनाए रखने की मांग कर रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रबंधन श्रम विभाग के नियमों का हवाला देकर अपने फैसले को उचित बता रहा है। संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो मामले को स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर पर उठाया जाएगा। फिलहाल कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन के बीच यह विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है।



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