ग्वालियर-भिंड मार्ग पर कई बसें पार्टी परमिट की आड़ में नियमित यात्री परिवहन कर रही हैं। इससे शासन को राजस्व नुकसान, वैध संचालकों को प्रतिस्पर्धी हानि …और पढ़ें

HighLights
- 80 बसों में केवल 50 के पास नियमित परमिट।
- करीब 30 बसें पार्टी परमिट पर नियमित संचालित हैं।
- जांच में परमिट की वैधता पर कम ध्यान दिया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-भिंड मार्ग पर यात्री बसों के संचालन को लेकर एक बार फिर परिवहन व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि बड़ी संख्या में बसें बिना नियमित रूट परमिट के पार्टी परमिट अथवा अन्य अस्थायी अनुमतियों की आड़ में नियमित यात्री परिवहन कर रही हैं।
इससे जहां शासन को राजस्व की हानि हो रही है, वहीं यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाने के बावजूद यह व्यवस्था लगातार जारी है।
80 बसों में केवल 50 के पास नियमित रूट परमिट
- जानकारी के अनुसार ग्वालियर और भिंड के बीच प्रतिदिन 80 से अधिक यात्री बसों का संचालन होता है। इनमें लगभग 50 बसों के पास ही नियमित रूट परमिट उपलब्ध हैं, जबकि शेष बसें अस्थायी या पार्टी परमिट के आधार पर यात्रियों को ढो रही हैं। नियमों के अनुसार पार्टी परमिट किसी विशेष समूह, धार्मिक यात्रा, संस्था या पूर्व निर्धारित आयोजन के लिए जारी किया जाता है। ऐसे परमिट पर नियमित रूप से यात्रियों को बैठाकर व्यावसायिक परिवहन करने की अनुमति नहीं होती।
दूसरे जिलों के परमिट पर हो रहा संचालन
- सूत्रों के अनुसार ग्वालियर-भिंड मार्ग पर चलने वाली कई बसें आगर-मालवा समेत अन्य जिलों में पंजीकृत हैं। क्षेत्र में बॉडी कोड और अन्य तकनीकी औपचारिकताओं से जुड़ी समस्याओं के कारण कुछ संचालकों ने अपने वाहनों का पंजीयन और परमिट अन्य जिलों से प्राप्त किए थे।
- हालांकि इन परमिटों का उपयोग विशेष परिस्थितियों और सीमित संचालन के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में कई बसों को नियमित यात्री बसों की तरह संचालित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 30 बसें ऐसी हैं, जो पार्टी परमिट पर संचालित होने के बावजूद प्रतिदिन चार से पांच फेरे लगा रही हैं।
जांच में परमिट की वैधता पर नहीं होता पर्याप्त परीक्षण
- परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि चेकिंग के दौरान अधिकारी आमतौर पर फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, टैक्स, प्रदूषण प्रमाणपत्र और चालक के लाइसेंस जैसे दस्तावेजों की जांच करते हैं। लेकिन यह कम ही देखा जाता है कि जिस मार्ग पर बस संचालित हो रही है, उस मार्ग पर नियमित यात्री परिवहन की उसे अनुमति है या नहीं।
- कई बस संचालक कार्रवाई से बचने के लिए आनलाइन पार्टी परमिट प्राप्त कर लेते हैं। ऐसे में दस्तावेज देखने पर बस तकनीकी रूप से वैध दिखाई देती है, लेकिन उसका वास्तविक उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पाता।
कार्रवाई के बाद बदला गया तरीका
- उल्लेखनीय है कि 16 मई को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और पुलिस विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर कई बसों की जांच की थी। उस दौरान चालानी कार्रवाई भी की गई थी।
- हालांकि कार्रवाई के बाद संचालन बंद करने के बजाय कई बस संचालकों ने नया तरीका अपना लिया। उन्होंने आनलाइन पार्टी परमिट या अन्य अस्थायी परमिट प्राप्त कर लिए, जिससे जांच के दौरान वे दस्तावेज प्रस्तुत कर कार्रवाई से बच जाते हैं। इससे शासन को कुछ राजस्व अवश्य मिल रहा है, लेकिन नियमित रूट परमिट व्यवस्था की मूल भावना कमजोर पड़ रही है।
यात्रियों की सुरक्षा और राजस्व दोनों प्रभावित
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी परमिट वाली बसें नियमित रूट पर संचालित होती हैं तो इससे वैध परमिट धारक बस संचालकों को आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही सरकार की परमिट व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
दुर्घटना की स्थिति में बीमा दावों और कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर भी जटिल परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। यात्रियों का कहना है कि परिवहन विभाग को ग्वालियर-भिंड मार्ग पर संचालित सभी बसों के परमिट की विशेष जांच करानी चाहिए और केवल वैध रूट परमिट वाली बसों को नियमित यात्री परिवहन की अनुमति दी जानी चाहिए।
क्या बोले परिवहन आयुक्त
परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने कहा कि यदि ग्वालियर-भिंड मार्ग पर बिना वैध परमिट के यात्री बसें संचालित हो रही हैं तो संबंधित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन संचालकों पर सख्ती बरती जाएगी और परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
