तीन सालों के भीतर निजी चिकित्सा संस्थानों में सिजेरियन आपरेशन में 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। …और पढ़ें

HighLights
- वर्ष 2019-21 में प्रदेश का कुल सिजेरियन आंकड़ा 12.1 % था
- वह वर्ष 2023-24 में उछलकर 16 % पर पहुंच गया
- तीन साल में सी-सेक्शन मामले में 9.4% का इजाफा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश में सामान्य प्रसव की जगह सिजेरियन आपरेशन (सी-सेक्शन) के जरिए बच्चों के जन्म देने का चलन बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के ताजा आंकड़े बताते है कि प्रदेश के निजी अस्पतालों में हर 10 गर्भवती में से छह महिलाओं की डिलीवरी आपरेशन के जरिए की जा रही है।
बीते तीन वर्षों में सिजेरियन प्रसव की दरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां वर्ष 2019-21 में प्रदेश का कुल सिजेरियन आंकड़ा 12.1 प्रतिशत था, वह वर्ष 2023-24 में उछलकर 16 प्रतिशत पर पहुंच गया है। ताजा आंकड़ों में निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा 61.7 फीसदी तक पहुंच गया है। इससे पिछले सर्वे में यह संख्या 52.3 फीसदी थी। तीन सालों के भीतर निजी चिकित्सा संस्थानों में सिजेरियन आपरेशन में 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकारी अस्पतालों में भी बढ़े मामले, पर निजी से काफी कम: सिजेरियन प्रसव के बढ़ते चलन की जद से सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भी अछूते नहीं हैं। हालांकि, निजी क्षेत्रों के मुकाबले यहां स्थिति काफी नियंत्रित है। सरकारी अस्पतालों में अब 10.4 फीसदी प्रसव आपरेशन के जरिए हो रहे हैं। पिछली रिपोर्ट में सरकारी क्षेत्र का यह आंकड़ा 8.2 फीसदी था।
एक्सपर्ट व्यू… हाइरिस्क गर्भवती महिलाओं की जान बचाने के लिए सिजेरियन प्रसव का चलन बढ़ा है। वहीं प्रसव का तरीका डाक्टर की सलाह और मां बच्चे की स्थिति के आधार पर भी तय होता है। – डॉ. अमित सक्सेना, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व प्रभारी संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं
