मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों का कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में जनभागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा मैदानी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने सोमवार को मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए केवल एक विभाग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागों के साथ निजी अस्पतालों और सामाजिक संस्थाओं को भी जोड़कर समन्वित प्रयास किए जाएं। उन्होंने अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में सफल नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें लागू करने के निर्देश भी दिए।

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योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित करें

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने महिला कर्मियों की अधिक संख्या वाली औद्योगिक इकाइयों में पीपीपी मॉडल के तहत वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में ऐसे हॉस्टलों का निर्माण शुरू हो चुका है। संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए प्रदेश में वन स्टॉप सेंटरों का विस्तार भी किया जा रहा है। पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, झाबुआ, इंदौर और धार सहित कई क्षेत्रों में नए वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं। वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और सहायता के लिए 13 जिलों में विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। 

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लाड़ली लक्ष्मी योजना में 15.84 लाख बालिकाओं का पंजीयन

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9.28 लाख बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। इसके अलावा 12,670 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में उन्नत कर मध्यप्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से मई 2026 तक 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को 47,775 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी गई है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत 15.84 लाख बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश लगातार ढाई वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, पोषण और शिक्षा से जुड़े हर पहलू पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है और इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

 



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