ग्वालियर के बिरलानगर सिविल अस्पताल में मंगलवार को सिजेरियन डिलीवरी के दौरान 25 वर्षीय रुकसार को अचानक हैवी ब्लीडिंग शुरू हो गई। …और पढ़ें

HighLights
- ब्लड प्रेशर गिरने से नाजुक हुई महिला रुकसार की हालत
- डॉ. अमित सक्सेना के नेतृत्व में 14 डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
- जटिल सर्जरी कर रोका खून का बहना, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर के बिरलानगर सिविल अस्पताल में मंगलवार को प्रसव के लिए भर्ती हुई एक 25 वर्षीय प्रसूता की जान पर उस वक्त बन आई, जब सीजेरियन ऑपरेशन के दौरान अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। महिला की हालत इतनी गंभीर हो गई कि वह मौत की कगार पर थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की सूझबूझ और 14 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की मुस्तैदी ने हार नहीं मानी।
डॉक्टरों ने ऑपरेशन थिएटर में कड़ी मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बचा लिया। चंदन नगर निवासी रुकसार को प्रसव पीड़ा होने पर बिरलानगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों ने जटिल स्थिति को देखते हुए सीजेरियन ऑपरेशन शुरू किया, तभी अचानक उसे हैवी ब्लीडिंग होने लगी, जिससे उसका ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगा और हालत बेहद नाजुक हो गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बिना एक पल गंवाए अलर्ट जारी किया और तत्काल शहर के अन्य अस्पतालों से भी मदद मांगी।
हजीरा, राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान से दौड़े विशेषज्ञ, ओटी में मौजूद रहे 14 डॉक्टर
आपातकालीन संदेश मिलते ही हजीरा सिविल अस्पताल से सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. राहुल श्रीवास्तव और डॉ. सौरभ गौतम तुरंत बिरलानगर अस्पताल पहुंचे। इसके अलावा बिरलानगर सिविल अस्पताल के अपने सर्जरी विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ और राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान में पदस्थ स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सक्सेना भी तत्काल पहुंचे।
देखते ही देखते ऑपरेशन थिएटर के भीतर करीब 14 वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम तैनात हो गई। इसके बाद डा. अमित सक्सेना के नेतृत्व में टीम ने एक बेहद जटिल और नाजुक सर्जरी को अंजाम दिया। डाक्टरों ने पूरी ताकत झोंककर ब्लीडिंग को नियंत्रित किया और प्रसूता की सांसों को टूटने से बचा लिया।
महिला की जान अब खतरे से बाहर
समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मौके पर मोर्चा संभाल लिया था। डॉक्टरों की इसी त्वरित प्रतिक्रिया और सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि आज प्रसूता की जान सुरक्षित बच सकी है। डिलीवरी के बाद अब जच्चा की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और खतरे से बाहर है। उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। – डॉ. जेके मंसूरिया, अधीक्षक सिविल अस्पताल, बिरलानगर
