मनोचिकित्सकों का भी मानना है-अत्यधिक तापमान न केवल शारीरिक थकान देता है, बल्कि मानसिक अवसाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। …और पढ़ें

HighLights
- पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा डिप्रेशन
- सेरोटोनिन बिगड़ने से आ रहे आत्मघाती विचार
- व्यवहार में बदलाव दिखें, तो तुरंत संभालें अपनों को
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। तीखी गर्मी, लू के थपेड़ों के कारण जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। लोगों को गर्मी न सिर्फ झुलसा रही है, बल्कि बढ़ता तापमान अब मानसिक टार्चर भी कर रहा है। जैसे ही तापमान बढ़ा है तो लोगों में मानसिक अवसाद बढ़ा है और आत्महत्या की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। ग्वालियर में हालिया दिनों में आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं।
महज चार दिन में ही आत्महत्या की पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं। छोटी-छोटी बातों पर ही लोगों ने जान दे दी। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा अवसाद बढ़ा है। मनोचिकित्सकों का भी मानना है- अत्यधिक तापमान न केवल शारीरिक थकान देता है, बल्कि मानसिक अवसाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। ऐसे में लोगों में आक्रामक प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है।
यह हैं कारण….जिनके कारण बनती है डिप्रेशन की स्थिति, बढ़ता है आवेश
- न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन: दिमाग में सेरोटोनिन नाम का न्यूरोट्रांसमीटर होता है। इसका काम होता है- मूड, स्वभाव और गुस्से को नियंत्रित करना। सेरोटोनिन के कारण ही शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। एक्स्ट्रीम हीट की स्थिति में न्यूरोट्रांसमीटर गड़बड़ा जाता है। सेरोटोनिन असंतुलित होते ही लोगों में अचानक घबराहट, डिप्रेशन बढ़ता है। इससे खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे इंपल्सिव थाट आने लगते हैं।
- क्रानिक स्लीप लास: तेज गर्मी में स्लीपिंग डिसआर्डर की समस्या सबसे ज्यादा होती है। उमस, तपन के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। अक्सर बिजली गुल होने से भी नींद टूटती है। ऐसे में नींद पूरी न होने, बीच में खुलने के कारण चिड़चिड़ाहट, मानसिक अवसाद जैसी स्थिति बन जाती है। गर्मियों में क्रानिक स्लीप लास की स्थिति अधिकांश लोगों के साथ बनती है। इससे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है।

यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान….
- परिवार का कोई सदस्य अधिक चिड़चिड़ा रहा है, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा कर रहा है।
- अगर ऐसा महसूस हो कि निर्णय लेने की क्षमता या तुरंत जवाब देने में अक्षमता जैसी स्थिति हो रही है।
- अत्यधिक थकान, हमेशा सिरदर्द बना रहना।
