मामला मुरार की एक 18 वर्षीय युवती और 24 वर्षीय युवक से जुड़ा है, जो पिंटू पार्क क्षेत्र का निवासी और एमएससी का छात्र था। …और पढ़ें

HighLights
- अदालत में आखिरकार हुई सत्य की जीत
- दोनों के बीच प्रेम प्रसंग से शुरू हुई कहानी
- पारिवारिक दबाव में बदली अपहरण और दुष्कर्म के झूठे केस में
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। मुरार क्षेत्र से जुड़ा एक चर्चित मामला जो हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रभात हिन्नारिया के यादगार मुकदमों में शामिल हो गया। इसमें प्रेम प्रसंग, अपहरण, दुष्कर्म, बयान बदलने और कथित समझौते के दबाव जैसे कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए। मामला मुरार की एक 18 वर्षीय युवती और 24 वर्षीय युवक से जुड़ा है, जो पिंटू पार्क क्षेत्र का निवासी और एमएससी का छात्र था। दोनों एक ही समाज से थे और दूर के रिश्तेदार भी बताए गए।
दोनों प्रेम प्रसंग के चलते फरार हुए फिर पकड़े गए फिर वो हुआ जिसने युवक के जीवन पर एक न मिटने वाला दाग छोड़ दिया। युवती ने परिवार के दबाव में युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। जेल गया, इधर न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। खैर, जीत अंत में सत्य की हुई। युवती के बयानों में गड़बड़ी पाने के बाद कोर्ट ने युवक को बरी कर दिया।
ऐसे समझें मामला
इस मामले में युवक और युवती दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए थे। परिवार की जानकारी के बिना दोनों घर से चले गए और करीब एक माह तक बाहर रहे। इस दौरान युवती के स्वजन ने मुरार थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। लगभग एक महीने बाद युवती अहमदाबाद से बरामद हुई, जिसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। बताया गया कि घर लौटने के बाद युवती ने युवक के खिलाफ बयान देते हुए आरोप लगाया कि वह उसे धमकाकर अपने साथ ले गया था। युवती ने कहा कि युवक ने धमकी दी थी कि यदि वह साथ नहीं जाएगी तो उसके पिता और भाई को जान से मार दिया जाएगा। युवती ने युवक के पिता पर भी धमकाने के आरोप लगाए। बाद में उसने यह भी आरोप लगाया कि गुजरात में एक माह तक उसे बंधक बनाकर रखा गया और युवक ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इन आरोपों के आधार पर मुरार थाने में मामला दर्ज किया गया और पुलिस युवक तथा उसके मित्र को गिरफ्तार कर ग्वालियर ले आई। मामले में युवक को करीब छह माह तक जेल में रहना पड़ा, जबकि उसके मित्र ने भी लगभग तीन माह जेल में बिताए।
समझौते में मांगी पिता की पूरी जमीन: मामले के दौरान समझौते की बातचीत भी सामने आई। आरोप है कि राजीनामे के बदले युवक के किसान पिता से उनकी पूरी 8 बीघा जमीन और 10 लाख रुपए की मांग की गई। हालांकि युवक की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रभात हिन्नारिया ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर मुकदमा पूरी मजबूती से लड़ने का फैसला किया। अधिवक्ता प्रभात हिन्नारिया के लिए भी यह मामला उन केसों में शामिल हो गया, जिन्हें वे अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार मुकदमों में गिनते हैं।
बयान बदले तो बदल गया केस: प्रकरण में उस समय बड़ा मोड़ आया जब पीड़िता ने अलग-अलग समय पर अपने बयान बदलना शुरू कर दिया। पहले बयान में उसने केवल युवक और उसके एक मित्र पर दुष्कर्म का आरोप लगाया, लेकिन बाद में बयान बदलकर चार दोस्तों द्वारा दुष्कर्म कराने की बात कही। वहीं एक अन्य बयान में उसने यह स्वीकार किया कि परिवार उसकी शादी कहीं और कराना चाहता था, इसलिए वह अपनी इच्छा से युवक के साथ गई थी।
