भगवान जगन्नाथजी के मूल धाम ओड़िसा के बाद दूसरे धाम के रूप में विख्यात कुलैथ में रथयात्रा की तैयारियां शुरु हो गई हैं। मंदिर से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 31 May 2026 10:47:31 AM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 10:47:31 AM (IST)

16 जुलाई को कुलैथ में निकलेगी भगवान जगन्नाथजी की रथ यात्रा, तीन दिनों तक महाप्रभु की भक्ति में डूबेगी जनता
भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा की कुलैथ में तैयारियां शुरु

HighLights

  1. भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा की कुलैथ में तैयारियां शुरु हो गई हैं
  2. 16 जुलाई को कुलैथ में निकलेगी भगवान जगन्नाथजी की रथ यात्रा
  3. चमत्कार के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में कुलैथ पहुंचेंगे श्रद्धालु

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भगवान जगन्नाथजी के मूल धाम ओड़िसा के बाद दूसरे धाम के रूप में विख्यात कुलैथ में रथयात्रा की तैयारियां शुरु हो गई हैं। मंदिर से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सभुद्रा की रथ यात्रा 16 जुलाई को परंपरागत रूप से निकाली जाएगी। रथ यात्रा एक दिन माता के मंदिर में विश्राम करने के बाद 17 जुलाई को वापस मंदिर आएगी।

रथ यात्रा की वापसी पर भगवान को घटों में भोग अर्पित किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ के सामने भात से भरे घट रखने पर स्वत: चार भागों में विभाजित हो जाते हैं। भगवान जगन्नाथ के प्रत्यक्ष होने के इस चमत्कार के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त कुलैथ आते हैं। इसके साथ ही नगर में इस्कान की भगवान जगन्नाथ की यात्रा 18 जुलाई को नगर में निकाली जाएगी।

आठ दिन पहले ज्वर से पीड़ित होंगे भगवान जगन्नाथ

ऐसी मान्यता है कि रथ यात्रा से आठ दिन पहले भगवान जगन्नाथ ज्वर से पीड़ित होते हैं। ऐसे मंदिर के पट आठ दिन के लिए बंद कर दिए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ के तप को कम करने के लिए औषधियां अर्पित की जाती है। एकांतवास की अवधि के पूर्ण होने पर पट खुले जाते हैं और भगवान को चावल से भरे घट अर्पित किए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ के कुलैथ में प्राण-प्रतिष्ठा से सदियों पुरानी किदवंती बाबा सावलदास से जुड़ी है।

अंचल में प्रचलित किदवंती के अनुसार बाबा सावलदास के माता-पिता का देंहात हो गया। उन्हें परिवार के लोगों ने बताया कि उनके माता-पिता जगन्नाथ यात्रा पर गये हैं और वे अगर वे दंडवत करते हुए जगन्नाथजी जाएंगे। बाबा पूरे सात बार जगन्नाथजी की यात्रा की। भगवान ने उन्हें स्वप्न में कहा कि वे कुलैथ में उनकी प्राण-प्रतिष्ठा करें। उन्हें उस पर विश्वास नही हुआ। फिर स्वप्न आया कि घर के किसी स्थान पर चावल के घट भरकर रखें। वह स्वत: अर्पित हो जाएंगे। उन्होंने ऐसा ही किया। घट स्वत: चार भागों में विभाजित हो गए। उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया।

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कुलैथ में तैयारियां शुरु

भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा की कुलैथ में तैयारियां शुरु हो गई हैं। मंदिर में रंग-रोगन किया जा रहा है। रथयात्रा के दौरान पूरा गांव ओड़िसा जैसा स्वरूप ले लेता हैं और यहां मेला लगता है। 16 जुलाई को रथयात्रा मंदिर प्रागंण से शुरु जयकारों के साथ शुरु होगी और गांव का भ्रमण करते हुए माता के मंदिर पहुंचेगी। यहां यात्रा का रात्रि विश्राम होता है। श्रद्धालु पूरी रात भजन-कीर्तन करते हैं और सुबह फिर रथ यात्रा शुरु होकर मंदिर पहुंचती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों के लिए यहां आते हैं।



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