होल्कर रियासत का इतिहास केवल शासन और प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, जनकल्याण और जनसंचार के क्षेत्र में भी उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मल्हारराव होल्कर से लेकर अंतिम शासक यशवंतराव होल्कर द्वितीय तक करीब 220 वर्षों के शासनकाल में कई लोकहितकारी कार्य किए गए।

शुरुआती दौर में धार्मिक और नैतिक शिक्षा के कुछ निजी केंद्र संचालित थे। इसके बाद मराठी और हिंदी की पाठशालाएं शुरू हुईं। वर्ष 1841 में हरिराव होल्कर ने पाश्चात्य शिक्षा का पहला स्कूल शुरू कराया। उस समय साक्षरता दर कम थी और शिक्षित लोग मुख्य रूप से सरकारी कार्यों में नियुक्त थे। ऐसे समय में राज्य की नीतियों, सूचनाओं और समाचारों को जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से होल्कर रियासत ने अपना पहला समाचार पत्र ‘मालवा अखबार’ शुरू किया।

6 मार्च 1849 को शुरू हुआ था ‘मालवा अखबार’


मध्यप्रदेश की राजधानी भले भोपाल हो, लेकिन समाचार पत्रों की राजधानी इंदौर को कहा जाता है। हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ के प्रकाशन के लगभग 22 वर्ष 9 माह बाद, 6 मार्च 1849 को इंदौर से ‘मालवा अखबार’ का प्रकाशन शुरू हुआ।

इसके संपादक धर्मनारायण थे। यह अखबार शुरुआत में प्रत्येक मंगलवार को प्रकाशित होता था। पहले पृष्ठ पर दाईं ओर हिंदी और बाईं ओर उर्दू में समाचार प्रकाशित किए जाते थे। बाद में इसका प्रकाशन बुधवार और फिर शुक्रवार को होने लगा।

शुरुआत में इसकी प्रसार संख्या 108 प्रतियां थी। वर्ष 1850 में यह 95, 1851 में 90 और 1854 में बढ़कर 105 प्रतियां दर्ज की गई। ‘मालवा अखबार’ लिथो प्रेस में छपता था और इसकी कीमत चार आना थी। वर्ष 1853 में इसका संपादन प्रेमनारायण ने संभाला।

किस्सों की शैली में छपती थीं खबरें


‘मालवा अखबार’ में शुरुआती दौर में समाचार और जानकारियां किस्सों की शैली में प्रकाशित होती थीं। राजा, महाराजा और नवाबों से जुड़ी खबरों को प्रमुखता दी जाती थी। वर्ष 1851 में इस अखबार ने वार्षिक समीक्षा प्रकाशित करना भी शुरू किया। इसमें होल्कर, सिंधिया और पवार शासकों के परिवारों का इतिहास कई किस्तों में प्रकाशित हुआ।

इंदौर में बढ़ता गया समाचार पत्रों का सिलसिला

‘मालवा अखबार’ से प्रेरित होकर इंदौर में अन्य पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन भी शुरू हुआ।


  • वर्ष 1852 में ‘दिल्ली-ए-अखबार’ साप्ताहिक शुरू हुआ।

  • 1861 में ‘पूर्ण चंद्रोदय’ का प्रकाशन आरंभ हुआ।

  • 1863 में मराठी साप्ताहिक ‘वृत लहरी’ प्रकाशित होने लगा।

  • 1873 में ‘इंदौर स्टेट गजट’ शुरू हुआ।

वर्ष 1875 से 1878 तक ‘मालवा अखबार’ मराठी साप्ताहिक के रूप में भी प्रकाशित हुआ। इसके साथ ही होल्कर रियासत में पत्रकारिता का विस्तार लगातार जारी रहा।

क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस


देश का पहला हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ 30 मई 1826 को कलकत्ता से प्रकाशित हुआ था। इसके संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल थे। हालांकि आर्थिक कठिनाइयों के चलते इसका प्रकाशन दिसंबर 1827 में बंद हो गया और यह करीब 16 महीने ही प्रकाशित हो सका। इसी ऐतिहासिक शुरुआत की स्मृति में हर वर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष हिंदी पत्रकारिता अपनी 200वीं वर्षगांठ मना रही है।



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