चैंबर चुनाव के लिए दावेदारों के नामों पर चर्चा से लेकर मुहर लगने का काम शुरू कर दिया गया है। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 28 May 2026 01:43:20 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 01:58:03 PM (IST)

चैंबर चुनाव: व्हाइट हाउस से पारस जैन अध्यक्ष पद के दावेदार, प्रवीण अग्रवाल का टिकट कटने से सियासत गरमाई!
चैंबर ऑफ कॉमर्स की बिल्डिंग और अध्यक्ष पद के दावेदार पारस जैन। सोशल मीडिया

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव की मैदानी तैयारी अब शुरू हो गई है। चैंबर चुनाव के लिए दावेदारों के नामों पर चर्चा से लेकर मुहर लगने का काम शुरू कर दिया गया है।

बुधवार को चैंबर ऑफ कॉमर्स के व्हाइट हाउस के पदाधिकारियों की बैठक का आयोजन होटल में किया गया जिसमें व्हाइट हाउस की ओर से अध्यक्ष पद के लिए पारस जैन का नाम तय किया गया। वर्तमान में चैंबर के सचिव दीपक अग्रवाल को इस बार भी मौका दिया जाएगा। वहीं कोषाध्यक्ष पद के लिए मनोज अग्रवाल का नाम लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा संयुक्त अध्यक्ष पद के लिए फिलहाल संभावित प्रत्याशियों में आशुतोष माहेश्वरी, रामकुमार गोयल व सुनील अग्रवाल का नाम है।

संयुक्त सचिव के लिए विपुल गुप्ता, दीपक पमनानी और बसंत अग्रवाल में से एक नाम जल्द तय होगा। वहीं क्रिएटिव हाउस भी अब अपने प्रत्याशियों के ताने बाने बुनने की तैयारी कर रहा और जल्द बैठक का आयोजन किया जाएगा।

प्रवीण अग्रवाल का टिकट कटा, अब होगा बड़ा खेल?

व्हाइट हाउस चुनाव से पहले संगठन की बैठक में ऐसा फैसला हुआ, जिसने पूरी कारोबारी राजनीति को हिला दिया। लंबे समय से सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे निवर्तमान अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का टिकट काट दिया गया। इस फैसले के बाद अब चेंबर की सियासत में बगावत और बड़े उलटफेर की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, प्रवीण अग्रवाल ने संगठन के सामने भावुक अपील करते हुए कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव होगा और उन्हें सम्मानजनक विदाई का मौका दिया जाए। लेकिन संगठन ने उनके नाम पर सहमति नहीं बनाई।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि टिकट कटने के बाद प्रवीण समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रवीण अग्रवाल जल्द ही कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो व्हाइट हाउस के मौजूदा समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

अब सवाल यही है-क्या प्रवीण खामोश रहेंगे या फिर चुनावी रण में नया मोर्चा खोलकर संगठन की मुश्किलें बढ़ाएंगे?



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *