ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल में रात में एक्सरे और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा नहीं मिल रही। मरीजों को जांच और गंभीर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में …और पढ़ें

HighLights
- रात में मुरार जिला अस्पताल का एक्सरे रूम बंद रहता है।
- आइसीयू में रात के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं रहते हैं।
- गंभीर मरीजों को जेएएच और निजी अस्पताल रेफर किया जाता।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मुरार जिला अस्पताल में रात के समय स्वास्थ्य सेवाओं की हालत चिंताजनक है। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की एक्सरे जांच नहीं हो पा रही, न ही आइसीयू में विशेषज्ञ इलाज। हालात यह हैं कि रात होते ही एक्सरे रूम पर ताला लग जाता है, जबकि आइसीयू में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नहीं रहता। इसका खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें गंभीर बीमारी की स्थिति में तत्काल इलाज की जरूरत होती है।
शहर में सड़क दुर्घटना, मारपीट या गिरने से घायल होकर जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को बिना जांच के ही इलाज दिया जाता है या फिर जयारोग्य अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार मरीजों के परिजन निजी जांच केंद्रों की ओर दौड़ लगाने को मजबूर हो जाते हैं।
अस्पताल के आइसीयू में रात के दौरान कोई विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद नहीं रहता। ऐसे में आकस्मिक इलाज कक्ष (इमरजेंसी) में ड्यूटी कर रहे डाक्टर को ही आइसीयू के मरीजों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। गंभीर मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें तुरंत जेएएच रेफर किया जाता है। इससे इलाज में देरी होने का खतरा बना रहता है।
दूसरे अस्पताल की इमरजेंसी शुरू कराने भेजे डॉक्टर
मजे की बात यह है कि जिला अस्पताल मुरार के आइसीयू में रात के समय डाक्टर उपलब्ध नहीं है। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सिविल अस्पताल बिरलानगर के आकस्मिक इलाज केंद्र के संचालन के लिए दो डाक्टर भेज दिए। ऐसे में रात में डाक्टरों का टोटा पड़ गया। अस्पताल प्रबंधन रोस्टर तैयार कर डाक्टरों की तैनाती करने का दावा कर रहा है।
छह टेक्नीशियन चाहिए, अस्पताल में सिर्फ चार
- एक्सरे जांच करने के लिए छह टेक्नीशियन की जरूरत है और अस्पताल में अभी चार ही उपलब्ध हैं। ऐसे में रात का रोस्टर तैयार नहीं होने के कारण एक्सरे जांच पर ताला लगा हुआ है, जिससे मरीजों को एक्सरे जांच के लिए रैफर किया जा रहा है।
- टेक्नीशियन और डॉक्टरों की कमी के चलते यह परेशानी आ रही है। जल्द ही आइसीयू में डॉक्टर की पदस्थापना के लिए रोस्टर तैयार किया जाएगा, जिससे वहां डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। डॉ.आरके शर्मा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
रात में रेफरल सेंटर बनता जा रहा जिला अस्पताल
जिला अस्पताल अब इलाज केंद्र कम और रेफरल सेंटर ज्यादा बनता जा रहा है। रात में आने वाले अधिकांश गंभीर मरीजों को सुविधा उपलब्ध नहीं कहकर दूसरे अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे गरीब और दूरदराज से आने वाले मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यह कहते हैं मरीज के परिजन
रात में एक्सरे नहीं होने की बात कहकर हमें सुबह आने को कहा गया। अब घायल मरीज को जेएएच लेकर जाना पड़ेगा या फिर निजी सेंटर पर जांच कराने। रामप्रसाद, परिजन आइसीयू में डाक्टर नहीं रहते है, सिर्फ इमरजेंसी डाक्टर देख रहे हैं। गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति खतरनाक है। अस्पताल प्रबंधन को डाक्टर की व्यवस्था करना चाहिए। पंकज सिंह, स्वजन
