ग्वालियर के झांसी रोड हाईवे किनारे जल निकासी की पुरानी नहर अतिक्रमण में दब गई। अवैध निर्माणों से बारिश में जलभराव का खतरा बढ़ा, प्रशासन ने जांच की बात …और पढ़ें

HighLights
- झांसी रोड किनारे पुरानी नहर अतिक्रमण के कारण गायब हुई।
- नहर की जमीन पर गैराज और व्यावसायिक निर्माण कर दिए गए।
- बारिश में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में जल निकासी व्यवस्था पर अतिक्रमण किस तरह भारी पड़ रहा है, इसका बड़ा उदाहरण झांसी रोड हाईवे किनारे बनी पुरानी नहर है। नाका चंद्रवदनी से लेकर विक्की फैक्ट्री तिराहा तक फैली यह नहर अब जमीन पर लगभग गायब हो चुकी है। कभी बारिश का पानी निकालने का प्रमुख स्रोत रही यह नहर अब केवल सरकारी नक्शों और दस्तावेजों में दर्ज है।
जमीन पर इसकी जगह पक्के और कच्चे अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। ऐसे हालात तब हैं, जब पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान ग्वालियर में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे और शहर की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।
दो किलोमीटर लंबी नहर अतिक्रमण की भेंट
झांसी रोड हाईवे के किनारे वन विभाग की सीमा से लगी यह नहर लगभग दो से सवा दो किलोमीटर लंबी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार अब इसका 100 मीटर हिस्सा भी सुरक्षित नहीं बचा है। नहर के ऊपर और आसपास धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया और जिम्मेदार विभाग देखते रहे। अब स्थिति यह है कि पूरी नहर की जमीन पर कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।
नहर के ऊपर बन गए गैराज और दुकानें
नाका चंद्रवदनी से लेकर विक्की फैक्ट्री तिराहा तक कई जगहों पर नहर को मिट्टी और मलबे से पाट दिया गया। इसके बाद यहां वाहनों के गैराज, वर्कशॉप और अन्य निर्माण कर लिए गए। तपोवन क्षेत्र के पास नहर का हिस्सा अब भी दिखाई देता है, लेकिन इसके आगे अधिकांश क्षेत्र में पहाड़ियों को काटकर जमीन समतल कर दी गई और कब्जे कर लिए गए।
बारिश में बढ़ सकता है जलभराव का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक जल निकासी स्रोत खत्म होने से शहर में जलभराव की समस्या लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में सड़कें डूब गई थीं और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक नहर को अतिक्रमण मुक्त कराने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वन विभाग के नक्शों में दर्ज है नहर
खास बात यह है कि यह नहर वन विभाग के आधिकारिक नक्शों में अब भी दर्ज है। इसके बावजूद वर्षों से हो रहे अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नहर को पुनर्जीवित नहीं किया गया तो आने वाले मानसून में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
प्रशासन ने कहा- कराएंगे जांच
झांसी रोड एसडीएम अतुल सिंह ने कहा कि नहर और अतिक्रमण की स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार केवल जांच नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई भी देखने को मिलेगी।
