मध्य प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से भले ही सियासी गलियारों में यह अटकलें लगाई जाती रही हैं कि मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं है। अभी भाजपा का पूरा ध्यान प्रधानमंत्री की 6 जून को प्रस्तावित मध्य प्रदेश यात्रा और आगामी राज्यसभा चुनाव पर है। स्वयं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी इस संबंध में स्पष्ट कर चुके हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश में फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की संभावना नहीं है।

मुख्य सचिव ने ली कलेक्टर्स-एसपी की क्लास

मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने हाल ही में प्रदेश के कमिश्नर्स, कलेक्टर्स,आईजी और एसपी के कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने वीसी के दौरान जिस तरह कुछ कलेक्टर को फटकार लगाई, उससे लगता है कि वे कई मामलों को लेकर चिंतित हैं। विशेष कर अपराधियों-खनिज और ड्रग माफियाओं का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव ने इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। अंदर खाने की खबर पर अगर भरोसा किया जाए तो ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस संबंध में मुख्य सचिव को संकेत दिए थे। इसका कारण भी है, सीएम कई अवसरों पर जिलों में ढीले प्रशासन पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। इसलिए ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार ही प्रशासनिक कार्यों और कानून व्यवस्था में सुधार के लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। 

कांग्रेस किसे बनाएगी राज्यसभा प्रत्याशी

प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी को लेकर खींचतान शुरू हो चुकी है। भाजपा ने जब से यह संकेत दिए हैं कि वह तीसरी सीट के लिए अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी, तब से दावेदारों ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इनमें मुख्य रूप से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव शामिल हैं। 

वन विभाग की बड़ी कुर्सी के लिए जोर-आजमाइश 

मध्य प्रदेश के वन मुख्यालय में इन दिनों सबसे महत्वपूर्ण विकास शाखा को लेकर जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। वर्तमान में पीसीसीएफ पुरुषोत्तम धीमान यहां पदस्थ हैं, जो इसी माह रिटायर हो रहे हैं। धीमान के बाद विकास शाखा की बागडोर किसके पास होगी, इसकी खोज शुरू हो गई है। फिलहाल इस शाखा के प्रमुख दावेदार 1997 बैच के आईएफएस अधिकारी एल. कृष्णमूर्ति बताए जा रहे हैं, जो कि एपीसीसीएफ वन्य प्राणी के पद पर पदस्थ हैं। इसके अलावा पीसीसीएफ वन्य प्राणी बनते-बनते रह गए। 1995 बैच के बीएस अन्नागिरी भी विकास शाखा की बागडोर लेने के उत्सुक दिखाई दे रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि राजनीतिक पहुंच नहीं होने की वजह से वे अपने मन चाहे पद के नजदीक पहुंचते ही फिसल कर नीचे पहुंच जाते हैं। इसी बीच पता चला कि इस शाखा के कार्य के लिए आईएफएस एसोसिएशन के अध्यक्ष हरि शंकर मोहन्ता ने भी दावेदारी ठोंक दी है। बहरहाल, वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन को यह तय करना है कि जंगल महकमे के इस महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी किस अधिकारी को दी जाए।

धार में एसपी की चेतावनी का दिखा असर

धार में भोजशाला को लेकर 15 मई शुक्रवार को आए हाईकोर्ट के फैसले के बाद 22 मई को पहला शुक्रवार शांतिपूर्ण निकल गया। कई लोगों की यह आशंका निराधार साबित हुई कि इस दिन कुछ बड़ा हंगामा होगा। इसके पीछे प्रशासन और पुलिस की सख्त नाकेबंदी और सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह रहा, जिसे कोई भेद नहीं सका। इसे एक दिन पूर्व धार के एसपी सचिन शर्मा द्वारा दी चेतावनी का असर ही कहा जाएगा कि दोनों समाज के लोग ठंडे पड़ गए। एसपी ने मीडिया के कैमरे के सामने आकर कहा कि जिसे अपनी हिम्मत आजमानी है और लगता है कि वह कानून को चुनौती दे सकता है तो शुक्रवार को कोशिश करके देख ले, पुलिस ऐसी कार्रवाई करेगी जो उसने कभी ख्वाब में भी नहीं सोची होगी। सभी का मानना है कि एसपी की यह आक्रामक अंदाज काम कर गया और शुक्रवार भी शांतिपूर्ण निकल गया।

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