डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। ग्वालियर शहर और आसपास के जिलों में लाइसेंसी हथियार अब कई परिवारों में विवाद की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। पिता या परिवार के मुखिया की मौत के बाद बंदूक और उसके लाइसेंस को लेकर भाइयों के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। कहीं बड़ा भाई हथियार पर कब्जा जमाए बैठा है तो कहीं छोटा भाई बंदूक छोड़ने को तैयार नहीं। कई मामलों में वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो लाइसेंस ट्रांसफर कराया गया और न ही हथियार थाने में जमा कराए गए।
हर सप्ताह आ रहे हैं तीन मामले
परेशान परिवारजन पुलिस और प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही। ग्वालियर जिले में करीब 31 हजार लाइसेंसी हथियार दर्ज हैं। इनमें से हर सप्ताह औसतन तीन मामले ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें परिवार के सदस्य हथियार जब्त कराने, सुरक्षित जमा कराने या कब्जा हटाने की मांग कर रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई लंबित बनी हुई है।
तीन साल बाद भी नहीं जमा हुई बंदूक
हजीरा क्षेत्र निवासी अनूप सिंह ने प्रशासन को शिकायत देकर बताया कि उनके पिता बेताल सिंह यादव के नाम 12 बोर दुनाली और टोपीदार बंदूकें थीं। नवंबर 2023 में पिता के निधन के बाद नियम के अनुसार हथियार जमा होना चाहिए था या लाइसेंस किसी वारिस के नाम स्थानांतरित होना था, लेकिन अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। आरोप है कि छोटे भाइयों ने हथियार अपने कब्जे में रख लिए हैं। इसी विवाद को लेकर परिवार में तनाव बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस संबंध में थाना ग्वालियर में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
दुनाली को लेकर भाइयों में बढ़ा विवाद
इंदरगढ़ क्षेत्र के एक परिवार में पिता की मौत के बाद 12 बोर दुनाली को लेकर दोनों बेटों के बीच चार साल से विवाद चल रहा है। छोटे भाई का आरोप है कि बड़ा भाई हथियार अपने साथ ले गया और लाइसेंस ट्रांसफर भी नहीं कराया। विरोध करने पर धमकाने की शिकायत भी प्रशासन तक पहुंची, लेकिन मामला अब तक सुलझ नहीं पाया।
पांच भाइयों के बीच फंसी लाइसेंसी बंदूक
दतिया निवासी सुग्रीव के निधन के बाद उनकी लाइसेंसी बंदूक पांच भाइयों के बीच विवाद का कारण बन गई। आरोप है कि दूसरे नंबर के भाई ने बंदूक अपने कब्जे में ले ली, जबकि अन्य भाई हथियार वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं। कई बार समझौते की कोशिश हुई, लेकिन विवाद खत्म नहीं हो सका।
थाने में जमा बंदूक पर कानूनी अड़चन
हजीरा निवासी बंटी राजपूत के पिता ने चुनाव के दौरान अपनी लाइसेंसी बंदूक थाने में जमा कराई थी। इसी दौरान उनका निधन हो गया। तय समय में लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अब हथियार वापस नहीं मिल पा रहा है। दोनों बेटे कोर्ट में आवेदन देकर बंदूक बेचने या जमा रखने की अनुमति मांग रहे हैं।
यह है नियम
हथियार लाइसेंसधारक की मृत्यु के बाद परिवार को पुलिस या प्रशासन को इसकी सूचना देना अनिवार्य होता है। इसके बाद हथियार थाने में जमा कराया जाता है। नियमानुसार बेटे, भाई, दामाद, पोते या अन्य पात्र रिश्तेदारों में से किसी एक के नाम लाइसेंस ट्रांसफर किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए परिवार की सहमति जरूरी होती है। विवाद होने पर प्रशासन हथियार जब्त कर आगे की कार्रवाई कर सकता है।
अधिकारियों का पक्ष: एडीएम सीबी प्रसाद ने कहा कि लंबित मामलों में पुलिस को रिमाइंडर भेजा जाएगा। वहीं सीएसपी कृष्णपाल सिंह यादव का कहना है कि शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
