नीट परीक्षा की तैयारी कर रही मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उसके परिजनों से फोन पर बातचीत की। राहुल गांधी ने छात्रा की मां नीलम चतुर्वेदी से बात करते हुए संवेदना व्यक्त की और कहा कि यदि उनके स्तर पर किसी प्रकार की मदद की जरूरत हो तो वह बताएं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने आकांक्षा का पत्र पढ़ने के बाद परिवार से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि पत्र पढ़कर उन्हें गहरा दुख हुआ और इसी कारण उन्होंने परिजनों से बात करने का निर्णय लिया।

बेटी ही थी परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद

फोन पर बातचीत के दौरान आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा थी और उसी के भरोसे परिवार भविष्य के सपने देख रहा था। नीलम ने कहा कि बेटी ने पढ़ाई के लिए लगातार मेहनत की थी और उसे विश्वास था कि वह डॉक्टर बनेगी। परिवार को भी उम्मीद थी कि उसकी सफलता से घर की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां बदलेंगी, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया।

मेहनत की, लेकिन सपना पूरा नहीं हो सका

मां ने राहुल गांधी से कहा कि सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की है कि आकांक्षा ने अपनी पढ़ाई के लिए दिन-रात मेहनत की थी। वह अपने परिणाम को लेकर आश्वस्त थी और उसे लगता था कि उसका सपना पूरा होगा। लेकिन हालात ऐसे बने कि वह मानसिक रूप से टूट गई। उन्होंने कहा कि अब परिवार के पास उसकी यादों के अलावा कुछ नहीं बचा है और जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई संभव नहीं है।

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राहुल गांधी ने जताई संवेदना

राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान कहा कि पत्र पढ़कर उन्हें महसूस हुआ कि आकांक्षा परिवार की परिस्थितियों और अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थी। उन्होंने कहा कि छात्रा ने कोई गलती नहीं की थी, बल्कि उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत की थी। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की सहायता की जरूरत हो तो वे अवश्य बताएं।

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पिता की बीमारी और आर्थिक संकट का भी जिक्र

बातचीत में नीलम चतुर्वेदी ने बताया कि आकांक्षा के पिता लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में परिवार की उम्मीदें काफी हद तक बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य से जुड़ी हुई थीं। बेटी के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

यह है पूरा मामला

दरअसल आकांक्षा चतुर्वेदी ने 20 मई को नागपुर में आत्महत्या कर ली थी। बाद में सामने आए उसके पत्र में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा था कि वह दोबारा परीक्षा देने का साहस नहीं जुटा पा रही है। पत्र सामने आने के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।



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