अपने पति और बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ दिल्ली में रह रही महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका प्रेमी उसे ग्वालियर लेकर आया। कंपू स्थि …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 18 May 2026 07:37:58 PM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 07:37:58 PM (IST)

दिल्ली में महिला की मौत... ग्वालियर में गुपचुप अंतिम संस्कार कर रहा था लिव-इन पार्टनर, पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम
ग्वालियर में गुपचुप अंतिम संस्कार कर रहा था लिव-इन पार्टनर

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अपने पति और बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ दिल्ली में रह रही महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका प्रेमी उसे ग्वालियर लेकर आया। कंपू स्थित मुक्तिधाम में गुपचुप उसका अंतिम संस्कार भी कर रहा था। तभी लाश के साथ उसे अकेला देखकर मुक्तिधाम में तैनात कर्मचारियों को संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत पुलिस को बुला लिया। जब पुलिस ने पूछताछ की तब कहानी खुली। पुलिस ने उसके पति और पिता को भी बुलवा लिया। उनकी मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम हुआ। महिला के प्रेमी का कहना है- तबीयत खराब होने से उसकी मौत हुई है। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। महिला के पति ने हत्या का संदेह जताया है।

भिंड से भागकर दिल्ली में रह रहे थे लिव-इन में

भिंड जिले में चौमो स्थित ताल का पुरा गांव की रहने वाली मीनू भदौरिया पुत्री शीतल भदौरिया की शादी रामचंद्र चौहान से हुई थी। शादी के बाद दो बच्चों का जन्म भी हुआ। भिंड में ही मीनू की दोस्ती धर्मेंद्र राठौर से हो गई। धर्मेंद्र राठौर दिल्ली के अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ में है। मीनू और धर्मेंद्र के बीच नजदीकी बढ़ गई और दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। 2024 में वह मीनू को साथ लेकर भाग गया। दोनों तभी से दिल्ली में लिव-इन में पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। मीनू की दिल्ली में मौत हो गई।

दिल्ली से धर्मेंद्र मीनू के शव को लेकर ग्वालियर आया। वह कंपू थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुढ़ा-गुढ़ी का नाका इलाके में स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार कर रहा था। वह अकेला था, तभी कर्मचारियों ने डायल-112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली। कंपू पुलिस ने अंतिम संस्कार रुकवाया। पहले तो वह मीनू को अपनी पत्नी बताने लगा, जब उसके स्वजनों को बुलाने की बात कही तो सच बताया। फिर शीतल भदौरिया और रामचंद्र चौहान को पुलिस ने बुलाया। मर्ग कायम किया गया और शव का पोस्टमार्टम हुआ।

घर में ही करता रहा इलाज, नहीं दिखा पाया कोई पर्चा

पुलिस ने जब धर्मेंद्र से मीनू के इलाज से जुड़े पर्चे की जानकारी मांगी तो वह नहीं दिखा पाया। उसने बताया कि वह खुद नर्सिंग स्टाफ में है। इसलिए घर पर खुद ही मीनू का इलाज करता रहा। तीन दिन तक घर में ही इलाज किया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। वह शव ग्वालियर लेकर आ गया।



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