नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्कूल शिक्षा विभाग का एक बेहद अनूठा और चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। विभाग ने प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखते हुए एक ऐसे सहायक ग्रेड-तीन यानि लिपिक को बहाल कर दिया, जो लंबे समय से दतिया में गैर-हाजिर चल रहा था। ताज्जुब की बात यह है कि कर्मचारी को निलंबित दतिया में किया गया था, लेकिन बहाली का तोहफा देते हुए उसे ग्वालियर स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, जब इस पूरे मामले में हुई गंभीर गड़बड़ी और तकनीकी खामियां उजागर हुईं, तो विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में लिपिक की नई जगह पर ज्वॉइनिंग रोक दी गई है।
लंबे समय से गायब रहने पर संयुक्त संचालक ने किया था निलंबित
यह पूरा मामला कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी दतिया में पदस्थ सहायक ग्रेड-तीन पारितोष मिश्रा से जुड़ा हुआ है। मिश्रा बिना किसी पूर्व सूचना के 18 मार्च 2025 से लंबे समय तक अपने कर्तव्य से अनुपस्थित चल रहे थे। दतिया डीईओ द्वारा भेजे गए अनुशासनिक कार्रवाई के प्रस्ताव पर कार्यालय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर ने पांच जून 2025 को उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
बाबू को नोटिस, मां की बाईपास सर्जरी का दिया हवाला
विभाग द्वारा जारी आरोप पत्र के जवाब में निलंबित बाबू पारितोष मिश्रा ने अपना लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने गायब रहने के पीछे मानवीय और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया। मिश्रा ने अपने जवाब में लिखा कि उनकी मां की बाईपास सर्जरी हुई थी और परिवार में वे अकेले व्यक्ति हैं, जिन्हें मां की देखरेख करनी पड़ रही थी। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं का स्वास्थ्य भी निरंतर खराब होने की बात कही और इसके समर्थन में चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र भी संलग्न किए। बाबू ने अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसा न दोहराने का वचन दिया।
दंड भी दिया और मनचाही बहाली भी दे दी
कार्यालय संयुक्त संचालक के 27 मई के आदेश के अनुसार, मानवीय आधारों को दृष्टिगत रखते हुए कर्मचारी के जवाब को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया। मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए मिश्रा की दो वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का दंड अधिरोपित किया गया।
प्रशासनिक कार्य सुविधा के नाम पर नियमों को घुमाया
कार्यालय केंद्रीय जिला पुस्तकालय ग्वालियर द्वारा भेजे गए एक मांग पत्र का हवाला देते हुए, प्रशासनिक कार्यसुविधा के नाम पर नियमों को घुमाया गया। निलंबित लिपिक को दतिया के बजाय सीधे कार्यालय केंद्रीय जिला पुस्तकालय, जिला ग्वालियर में सहायक ग्रेड-तीन के रिक्त पद पर बहाल कर दिया गया। इतना ही नहीं, निलंबन अवधि को भी कर्तव्यरूढ़ अवधि मानकर प्रकरण समाप्त कर दिया गया।
मामला उछला तो ज्वॉइनिंग पर लगी रोक
निलंबन दतिया में और बहाली सीधे ग्वालियर के पुस्तकालय में किए जाने का यह मामला जैसे ही चर्चा में आया, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के कान खड़े हो गए। एक जिले के निलंबित कर्मचारी को दूसरे जिले में इस तरह उपकृत करने के पीछे के घालमेल पर उंगलियां उठने लगीं। मामला तूल पकड़ते देख ग्वालियर पुस्तकालय में बाबू की ज्वाइनिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब आगामी दिनों में विभाग इस पूरे मामले और आदेश की समीक्षा करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगा।
शिक्षा विभाग में यह चलता रहा है इस तरह का खेल
शिक्षा विभाग में पहले दूसरी जगह पर कर्मचारियों को निलंबित करना और निलंबन के समय दूसरी जगह अटैच करने व बाद में अटैच वाली जगह पर बहाल करने का खेल विभाग के अफसर पहले भी खेलते रहे हैं। जो मामले पकड़ में आ गए और उछल गए, उन मामलों में कर्मचारियों को निलंबन वाली जगहों पर ही वापस भेजकर बहाल कर दिया गया। जो मामले सामने नहीं आए या उछले नहीं, उनमें निलंबन के बहाने ट्रांसफर कर दिया। बताया जाता है कि संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में 2018 में भी इस तरह के कई मामले हुए थे।
दतिया जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ लिपिक को ग्वालियर में बहाल करने की गलती सामने आते ही उसकी ज्वाइनिंग पर रोक लगा दी गई है। उसे कहां पर ज्वाइन कराना है, इसका निर्णय आगे लिया जाएगा। – अरविंद सिंह, संयुक्त संचालक शिक्षा ग्वालियर
