नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल में मानसून आने के पहले एक से दो महीने जल आपूर्ति के हिसाब से काफी मुश्किल भरे होते हैं। क्योंकि अंचल में सूरज के तेवर तीखे होते हैं और पानी की खपत बढ़ जाती है। शहर में ज्यादातर जगह पर पानी की आपूर्ति तिघरा बांध से होती है। लेकिन अप्रैल महीने से ही इसकी सांसें फूलने लगी हैं। क्योंकि गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में पानी की खपत तो बढ़ी ही है, साथ ही बांध से पानी का वाष्पीकरण होना भी बढ़ जाता है। तिघरा बांध से इन दिनों रोजाना करीब तीन एमसीएफटी पानी तेज धूप के कारण वाष्पीकृत हो रहा है। बांध का जलस्तर लगातार नीचे जाने से सप्लाई का प्रेशर घट गया है, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में जल संकट होना शुरू हो गया है। कई इलाकों में तिघरा की सप्लाई सही प्रेशर नहीं पहुंच पा रही है, जिससे लोगों को पानी नहीं मिल रहा।
रोकनी होगी पानी की बर्बादी
गर्मी के मौसम में हर साल पानी का संकट पैदा होता है। इसलिए घटते प्रेशर और रोज वाष्पीकृत होते लाखों लीटर पानी को संतुलित करने की जरूरत है और शहरवासियों को भी अब पानी की बर्बादी रोकनी होगी। इसके साथ ही शहर में जहां भी पानी का दुरुपयोग हो रहा है। उस पर निगम को अंकुश लगाने की जरूरत है।
आबादी बढ़ी पर पुराना है पानी का मापदंड
अगर आंकड़ों के गणित को समझें तो नगर निगम ग्वालियर इस समय जरूरत से ज्यादा पानी लिफ्ट कर रहा है, फिर भी शहर जलसंकट है। 10 वर्ष पहले शहर की 12 लाख आबादी के लिए छह एमसीएफटी पानी और 1.50 एमसीएफटी का लास मिलाकर कुल 7.50 एमसीएफटी पानी पर्याप्त माना जाता था। वर्तमान स्थिति में ग्वालियर की आबादी करीब 15 लाख से अधिक हो चुकी है। एक व्यक्ति को 135 लीटर पानी की जरूरत होती है। इस आधार पर शहर को 10 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता होनी चाहिए।
निगम की सप्लाई
नगर निगम वर्तमान में तिघरा से 12.25 एमसीएफटी पानी रोज ले रहा है (यानी जरूरत के मापदंड से लगभग तीन एमसीएफटी ज्यादा)। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में पानी की बूंद-बूंद के लिए जंग छिड़ी हुई है।
प्रेशर कम होने से इन इलाकों में पैदा हुआ जल संकट
बांध में पानी का लेवल कम होने से लाइनों में सप्लाई का प्रेशर ड्राप हो गया है। इसका सबसे ज्यादा असर शहर के कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
- दक्षिण विधानसभा क्षेत्र: कंबल केंद्र, लोहागढ़ क्षेत्र, बेलदार का पुरा, काला सैय्यद, संजय नगर, सैनिक कालोनी, गुढ़ा पहाड़ी और पिछोरियों की पहाड़ियां जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में पानी नहीं चढ़ पा रहा है।
- ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र: मोतीझील, खटीक मोहल्ला, शिंदे की छावनी, क्रेशर कालोनी, डोंगरपुर, आखूखाना और किशनबाग में पाइपलाइनों में प्रेशर न होने और गेंडे वाली सड़क पर नई लाइनें डालने के काम के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
अगस्त तक ही हो सकती है आपूर्ति
जल संसाधन विभाग का अनुमान है कि तिघरा में उपलब्ध वर्तमान पानी से शहर को केवल सात से 10 अगस्त तक ही सप्लाई दी जा सकती है। यदि आगामी मानसून में देरी होती है या वर्षा कम होती है, तो ग्वालियर को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
