नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। भगवान सूर्यदेव 25 मई को रोहणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके सात ही नौ तपा शुरु हो जायेंगे, जिसका समापन नौ दिन तक रहेगा। हालांकि नौ तपा से पहले ही धरती तपने लगी है और आसमान से आग जैसी बरस रही है। गर्म हवा के थपेड़ों से दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटाा छाने लगा है।
ऐसी मान्यता है कि नौ तपा में धरती के तपने से अच्छी बारिश होने के संकेत मिलते हैं। मौसम विभाग ने भी नौ दिन भीषण गर्मी के संकेत दिये हैं। हिंदू पंचांग में एक ऐसा समय भी आता है जब सूर्य अपनी सबसे तीव्र ऊर्जा के साथ पृथ्वी पर प्रभाव डालते हैं, जिससे गर्मी चरम पर पहुंच जाती है।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की लगभग नौ दिनों तक चलने वाले नौतपा में भीषण गर्मी पड़ने की संभावनाएं हैं। वहीं ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति बता रही है कि इस दौरान कई स्थानों पर तेज गर्म हवाएं और असहनीय तापमान देखने को मिल सकता है।
मान्यता है कि, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती हैं। नौतपा ज्येष्ठ महीने में लगता है, इस दौरान सूर्य का तेज और अग्नि तत्व अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिसका सीधा असर पृथ्वी और मौसम पर देखने को मिलता है।
कहा जाता है कि, नौतपा के दिनों में सूर्य की किरणें अधिक प्रखर होकर धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही वजह है कि इस समय भीषण गर्मी और तेज लू का सामना करना पड़ता है। नौतपा में ऐसे फलों का प्रयोग करना शुभ होता है जिसमें जल की मात्रा अधिक हो। नौतपा में खरबूजे का दान करना शुभ माना गया गया है। आप खरबूजा दान कर सकते हैं।
नौतपा का ज्योतिषीय कारण
- वैदिक ज्योतिष में रोहिणी नक्षत्र को अत्यंत प्रभावशाली और “तप्त” नक्षत्र माना गया है।
- जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब पृथ्वी पर गर्मी का प्रभाव सबसे अधिक बढ़ जाता है।
- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा माना जाता है, लेकिन सूर्य की तेज अग्नि शक्ति यहां अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, जिससे तापमान बढ़ता है।
- नौतपा के समय सूर्य सामान्यतः वृषभ राशि में स्थित होते हैं।
- वृषभ पृथ्वी तत्व की राशि है। सूर्य की उष्णता पृथ्वी तत्व पर अधिक असर डालती है, इसलिए भूमि तेजी से गर्म होती है।
नौतपा में किन बातों का ध्यान रखें
- अधिक धूप में निकलने से बचें
- शरीर में पानी की कमी न होने दें
- सात्विक भोजन करें
- क्रोध और विवाद से बचें
नौतपा में किन चीजों का दान करें
लेकिन ज्योतिष के अनुसार यह समय केवल तपन का नहीं, बल्कि साधना, दान और आत्मशुद्धि का भी होता है. यदि सही तरीके से इस अवधि को जिया जाए, तो सूर्य की कृपा से जीवन में मान-सम्मान, सफलता और स्थिरता भी प्राप्त हो सकती है. यही कारण है कि नौतपा को एक आध्यात्मिक अवसर के रूप में भी देखा जाता है।
सूर्य-रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव
यह समय व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने का अवसर देता है. यदि इस अवधि में साधना, मंत्र जाप और दान किया जाए, तो सूर्य दोष कम होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.
जल और शीतल दान का महत्व
नौतपा के दौरान सबसे अधिक महत्व जल दान को दिया गया है। मान्यता है कि इस समय राहगीरों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना और ठंडी चीजों का वितरण करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। मिट्टी के घड़े में ठंडा पानी, शरबत, छाछ और तरबूज जैसे फलों का दान न केवल शारीरिक राहत देता है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी शुभ माना जाता है।
सूर्य को मजबूत करने के उपाय
नौतपा के दौरान सुबह सूर्य को जल अर्पित करना, “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना और तांबे के पात्र का उपयोग करना शुभ माना गया है। सूर्य मजबूत होने से व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व गुणों में भी वृद्धि होती
