ग्वालियर के घाटीगांव क्षेत्र में हाईवे के पास पहुंचे केएपी-वन चीते की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वन विभाग लगातार निगरानी कर ट्रैफिक धीमा करवा रहा है, ताकि …और पढ़ें

HighLights
- घाटीगांव हाईवे किनारे दो दिनों से बैठा रहा चीता।
- वन विभाग और ट्रैकिंग टीम लगातार निगरानी में जुटी।
- हाईवे पर बेरीकेड लगाकर ट्रैफिक धीमा कराया गया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क की सीमा पार करने के बाद चीतों की सुरक्षा भी अब चिंता का विषय बन गई है। इन दिनों यहां ग्वालियर के घाटीगांव क्षेत्र में केएपी-वन चीता डेरा डाले हुए है, जिसको लेकर अलर्ट है। इसका कारण है चीते का हाईवे के नजदीक आ जाना।
पिछले दो दिन से चीता घाटीगांव हाईवे से 100 से 200 मीटर की दूरी पर बैठा हुआ था, तो चिंता यह हुई कि वह अचानक हाईवे क्रास न कर ले और वाहन से न टकरा जाए। इसे टालने के लिए दो दिन से वन अमला और कूनो की ट्रैकिंग टीम सिमरिया टांका से घाटीगांव तक निगरानी रख रही है।
बेरीकेड के जरिये इस हिस्से पर ट्रैफिक को धीमा किया गया। सोमवार सुबह चीते ने हाईवे क्रॉस कर लिया। अब चीता हाईवे से डेढ़ किमी अंदर तक पहुंच गया है।
पिछले साल टक्कर से हो गई थी शावक की मौत
बता दें कि दिसंबर 2025 में ग्वालियर के घाटीगांव सिमरिया टांका पर सुबह एक कार ने सड़क पार कर रहे चीते को टक्कर मार दी थी। यह चीता गामिनी का शावक था, जिसके मुंह पर टक्कर लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शावक के साथ दूसरा चीता बाल-बाल बच गया। जिस चीते की मौत हुई उसका नाम केजी-तीन था, उसके साथ मौजूद केजी-फोर चीता भी था।
इस हादसे के बाद से वन विभाग व कूनो के अधिकारियों ने सबक लिया। अब चीते की लोकेशन हाईवे किनारे आने पर सुरक्षा बढ़ा दी जाती है।
दिन रात की निगरानी, जहां लाइट वहां लगाए बेरीकेड
पिछले दो दिनों से घाटीगांव हाइवे पर सिमरिया टांका से लेकर घाटीगांव तक दिन रात निगरानी की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस को सूचना देकर ट्रैफिक को धीमा निकालने की प्रक्रिया की गई। बेरीकेड वहां लगाए गए जहां लाइट है, क्योंकि वाहन चालक बेरीकेड से न टकरा जाए। इसका भी ध्यान रखा है। रात के समय निगरानी करना जटिल हो जाता है।
