ग्वालियर नगर निगम परिषद बैठक में जलसंकट, स्मार्ट सिटी भ्रष्टाचार और निगम कार्यों को लेकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने धरना-प्रदर्शन किया और कई मामलों में ज …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 19 May 2026 11:33:15 AM (IST)Updated Date: Tue, 19 May 2026 11:33:15 AM (IST)

ग्वालियर में जलसंकट पर निगम परिषद में हंगामा, पार्षदों का धरना-प्रदर्शन, स्मार्ट सिटी इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
जलसंकट को लेकर विपक्षी पार्षदों ने नगर सरकार पर जमकर निशाना साधा। (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. जलसंकट को लेकर पार्षदों ने सदन और बाहर प्रदर्शन किया।
  2. स्मार्ट सिटी इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए।
  3. आइएसबीटी तैयार, लेकिन बस संचालन शुरू नहीं होने पर सवाल।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम परिषद की अभियाचित बैठक सोमवार को एक बार फिर हंगामे, धरने और आरोप-प्रत्यारोप के बीच संपन्न हुई। शहर में गहराते जलसंकट को लेकर विपक्षी पार्षदों ने निगम प्रशासन और नगर सरकार पर जमकर निशाना साधा।

बैठक के दौरान जहां एक पार्षद ने सदन के भीतर धरना दिया, वहीं दूसरी पार्षद जनता के साथ परिषद भवन के बाहर मटके फोड़कर प्रदर्शन करती नजर आईं। स्मार्ट सिटी के कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप भी सदन में गूंजे और कर्मचारियों को नगर निगम में समायोजित करने पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।

जलसंकट पर सदन में धरना और प्रदर्शन

  • नगर निगम परिषद की 10वीं अभियाचित बैठक में वार्ड एक की पार्षद सईदा आसिफ अली ने क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर आसंदी के सामने धरना दिया। उनका कहना था कि वह पहले भी तीन बार इसी मुद्दे को उठा चुकी हैं, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामला टाल देते हैं।
  • इस पर सभापति मनोज तोमर ने पदेन आयुक्त प्रदीप तोमर से जवाब मांगा। आयुक्त ने बताया कि संबंधित क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए फाइल स्वीकृत हो चुकी है और जल्द काम शुरू होगा। तब तक जरूरत वाले क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाएगी।
  • दूसरी ओर वार्ड दो की पार्षद आशा सुरेंद्र चौहान ने क्रेशर कॉलोनी घोसीपुरा में जलसंकट को लेकर जनता के साथ शब्द प्रताप आश्रम से पैदल मार्च निकाला और परिषद भवन के बाहर मटके फोड़कर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि सात दिन में समस्या हल नहीं हुई तो महापौर और अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।
  • पानी के मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस पार्षदों में हंगामा

    बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार भी जनता को पानी उपलब्ध कराने में विफल रही है। इस बयान पर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। कुछ देर तक नारेबाजी और बहस का दौर चलता रहा।

    निगम संपत्तियों और वित्तीय कार्यों पर चर्चा टली

    बैठक की शुरुआत में निगम की अचल संपत्तियों की बिक्री में कथित गड़बड़ियों पर चर्चा होनी थी, लेकिन नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि निगमायुक्त की ओर से संबंधित फाइल शुक्रवार को भेजी गई थी। शनिवार और रविवार अवकाश होने के कारण पार्षद फाइलों का अध्ययन नहीं कर पाए। इसके बाद सभापति ने 15वें वित्त आयोग, ग्वाला नगर और स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों से जुड़ी फाइलों के अध्ययन के लिए समय देते हुए बैठक को 11 जून तक स्थगित कर दिया।

    स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के आरोप

    • सदन में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर भी तीखी चर्चा हुई। पार्षद मनोज राजपूत ने कहा कि उनके वार्ड में आइएसबीटी भवन बनकर तैयार है, लेकिन वहां से एक भी बस का संचालन नहीं हो रहा। विधायक प्रतिनिधि कृष्णराव दीक्षित ने स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रोड निर्माण के अलावा कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ।
  • उन्होंने स्मार्ट सिटी कर्मचारियों को नगर निगम में समायोजित करने की तैयारी पर भी सवाल उठाए। इसके बाद सभापति ने सात दिन में स्मार्ट सिटी के कार्यों की रिपोर्ट मांगी और कर्मचारियों के निगम में आने पर रोक लगाने के निर्देश दिए।
  • केबल खरीद मामले की जांच के लिए समिति गठित

    बैठक में पार्षद ब्रजेश श्रीवास ने केबल खरीद मामले में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में सिर्फ एक इंजीनियर पर कार्रवाई करना उचित नहीं है, क्योंकि टेंडर प्रक्रिया में पूरी समिति शामिल होती है। इस पर सभापति ने गिर्राज कंसाना के संयोजन में पार्षद ब्रजेश श्रीवास, मोहित जाट और मनोज राजपूत की संयुक्त जांच समिति गठित की, जिसे 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए।

    नामांतरण प्रक्रिया में पटवारी टीप खत्म

    सदन में काबिज के आधार पर नामांतरण प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। पार्षदों ने कहा कि पटवारी टीप अनिवार्य होने से लोगों को परेशानी होती है और निगम को राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है। इस पर सभापति ने नामांतरण में पटवारी टीप की अनिवार्यता समाप्त करने के निर्देश दिए।



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