इन जालियों के लगने के साथ मंदिर पूरी तरह से पैक हो जाएगा। अब मंदिर की सुंदरता बढ़ाने के लिए फसाड लगना शेष हैं। …और पढ़ें

HighLights
- जालियों के बाद लगेगी फसाड लाइट
- पशु-पक्षी नहीं कर पाएंगे प्रवेश
- हाई कोर्ट के दखल के बाद फैसला
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अचलेश्वर मंदिर के गर्भगृह को वातानुकूलित बनाने का फिलहाल मंदिर संचालन समिति का कोई इरादा नहीं है। क्योंकि अंतिम खिड़कियों में पत्थर की जाली लगना शुरू हो गई हैं। मंदिर के चारों द्वार पर दरवाजे लगने के बाद इन खिड़कियों में जाली लगने के बाद पशु-पक्षी भी प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
कॉन्ट्रेक्टर काम छोड़कर चला गया
इन खिड़कियों में से बिल्ली और पक्षी रात में प्रवेश कर गंदगी कर जाते थे। इन जालियों के लगने के साथ मंदिर पूरी तरह से पैक हो जाएगा। अब मंदिर की सुंदरता बढ़ाने के लिए फसाड लगना शेष हैं। मंदिर के निर्माण के लिए कान्ट्रेक्टर के साथ अचलेश्वर मंदिर के निर्माण की शर्तों में मंदिर के दोनों तरफ से एंट्री गेट के साथ फसाड लाइट भी शामिल थे। मंदिर संचालन समिति से विवाद होने के कारण कान्ट्रेक्टर बीच में अधूरा काम छोड़कर चला गया।
शीतल जल की प्याऊ का जीर्णोद्धार अटका: भीषण गर्मी शुरू हो गई है। अचलेश्वर मंदिर पर पुरानी प्याऊ जीर्णोद्धार के लिए ध्वस्त कर दी गई है। प्याऊ के साथ दुकानों के निर्माण पर विवाद शुरू होने के कारण प्याऊ के नवनिर्माण का कार्य अटक गया है।
पहले से तय नहीं था, ऊपर की खिड़कियां में क्या लगना है
अचलेश्वर न्यास ने मंदिर का निर्माण नक्शा स्वीकृत कई बातों पर ध्यान नहीं दिया। मंदिर के चारों तरफ तीन खानों की खिड़कियां थीं। पहले खाने में थे लाल पत्थर लग गया। दूसरे और तीसरे खाने में क्या लगना है। यह पहले से तय नहीं था। कुछ न्यायसियों का विचार कांच लगाकर मंदिर के गर्भगृह के वातानुकूलित बनाने का था। इसी बीच न्यास में विवाद हो गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट ने न्यास के भंग कर मंदिर का संचालन जिला प्रशासन को सौंप दिया।
प्रशासन ने न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार सेवानिवृत्त न्यायाधीश एनके मोदी की अध्यक्षता समिति गठित कर दी। यह समिति अब मंदिर से जुड़े सैंद्धातिक फैसले ले रही है। समिति ने ऊपर के रिक्त स्थान पर ग्वालियर स्टोन की जाली लगवाना शुरू कर दी हैं। मंदिर की पहली जाली और दूसरी जाली के रंग में अंतर होने के कारण एकरूपता नहीं आ पा रही है।
