सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अधोसंरचना विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी लगातार नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासनिक अधिकारी जहां प्रतिदिन तपती धूप में विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं, वहीं जनप्रतिनिधियों ने भी सिंहस्थ से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं—कान्ह डायवर्शन योजना, नए घाटों का निर्माण, ब्रिज निर्माण, नई सड़कों के विकास, मेडिसिटी और मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान जनप्रतिनिधि निर्माणाधीन टनल में उतरकर कार्यों की प्रगति देखने पहुंचे। निरीक्षण के बाद जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों पर संतोष जताते हुए कहा कि इस बार सिंहस्थ का आयोजन ऐतिहासिक होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी संत उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव और उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी ने संभागायुक्त एवं सह सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मिनी बस में बैठकर निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया।
दिसंबर 2026 तक पूरे होंगे 6 ब्रिज
संभागायुक्त आशीष सिंह ने बताया कि सिंहस्थ से जुड़े छह ब्रिजों का निर्माण दिसंबर 2026 से पहले पूरा कर लिया जाएगा। वहीं नईखेड़ी सड़क परियोजना भी दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने जनप्रतिनिधियों को मटेरियल टेस्टिंग लैब का निरीक्षण कराया। उन्होंने बताया कि सीमेंट, गिट्टी, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री की लगातार जांच की जा रही है तथा सभी टेस्ट रिपोर्ट रिकॉर्ड में सुरक्षित रखी जा रही हैं।
ब्रिज निर्माण में आधुनिक तकनीक का उपयोग
भूखी माता ब्रिज के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को नई निर्माण तकनीक की जानकारी दी। ब्रिज प्लेटफॉर्म में लोहे की चादरों से बने पाइपों का उपयोग किया जा रहा है, जिनके चारों ओर कंक्रीट और लोहे का जाल लगाया जाता है। इससे संरचना का वजन कम होता है और मजबूती बढ़ती है। संभागायुक्त और कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि ऐसी नई तकनीकों के उपयोग की जानकारी समय-समय पर साझा की जाए।
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24.5 मीटर गहरी टनल में पहुंचे जनप्रतिनिधि
जनप्रतिनिधियों ने शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी कान्ह डायवर्शन परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान सभी प्रतिनिधि जमीन से 24.5 मीटर नीचे निर्माणाधीन टनल में उतरे और कार्यों का जायजा लिया। इंजीनियरों ने बताया कि परियोजना की कुल लंबाई 30.15 किलोमीटर है। इसमें 18.15 किलोमीटर हिस्से में कट-एंड-कवर तकनीक से क्लोज डक्ट का निर्माण हो रहा है, जबकि 12 किलोमीटर क्षेत्र में टनल बनाई जा रही है। टनल निर्माण के लिए चार शाफ्ट भी तैयार किए जाएंगे, जिससे सफाई और रखरखाव में सुविधा होगी। परियोजना सितंबर 2027 तक पूरी होने की संभावना है।
29 किलोमीटर नए घाटों पर करेंगे श्रद्धालु स्नान
जनप्रतिनिधियों ने त्रिवेणी स्थित श्री शनि मंदिर के पास निर्माणाधीन घाटों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई सुझाव दिए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए शिप्रा नदी पर बड़े स्तर पर घाट निर्माण किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और सुरक्षित स्नान व्यवस्था मिल सकेगी। अधिकारियों ने बताया कि शिप्रा नदी पर 29 किलोमीटर नए घाट बनाए जा रहे हैं, जबकि 7 किलोमीटर पुराने घाटों का भी उपयोग किया जाएगा।
नए ब्रिज से आवागमन होगा आसान
भूखी माता मंदिर के पास शिप्रा नदी पर बन रहे 175 मीटर लंबे ब्रिज का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इसका निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इस ब्रिज के बनने से सिंहस्थ क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शहर में निर्माणाधीन मेडिसिटी और मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मेडिसिटी परियोजना से उज्जैन को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलेगा और निर्माण कार्य तय समय से पहले गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाएगा।
