जिले के उचेहरा ब्लॉक के आदिवासी बहुल परसमनिया पहाड़ क्षेत्र में एक ही परिवार के चार लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। हालत गंभीर होने पर सभी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 7 वर्षीय कृष्णा दहिया की रास्ते में ही मौत हो गई। परिवार के तीन अन्य सदस्य निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार परसमनिया निवासी बाबूलाल दहिया (62), उनकी पत्नी शांति बाई दहिया (60), 12 वर्षीय शिवम दहिया और 7 वर्षीय कृष्णा दहिया की बुधवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। सभी को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज कमजोरी की शिकायत होने लगी। परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर निकले लेकिन रास्ते में ही कृष्णा दहिया ने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद बच्चे के चाचा सुरेंद्र दहिया ने गांव में दूषित पानी की समस्या को लेकर प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गांव में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है और लोग हैंडपंप, कुएं व तालाब के पानी पर निर्भर हैं। कई बार हैंडपंप से बदबूदार और गंदा पानी निकलता है, जबकि कुओं की सफाई भी नहीं कराई जाती। परिजनों के मुताबिक अस्पताल में डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में संक्रमण और डायरिया जैसे लक्षण बताए हैं। तीनों मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
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इधर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उचेहरा बीएमओ डॉ. ए.के. राय ने बताया कि परिवार के घर के पीछे करेले की बाड़ी लगी हुई है, जहां बुधवार को कीटनाशक का छिड़काव किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि उसी करेले की सब्जी खाने से फूड पॉइजनिंग हुई हो सकती है। इसके अलावा परिवार के लोगों ने रात में बेल का शरबत भी पिया था। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इस एंगल से भी जांच कर रहा है कि कहीं शरबत में कोई गड़बड़ी तो नहीं थी। वहीं ग्रामीण दूषित पानी को भी बीमारी की वजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में जल स्रोत दूषित हो जाते हैं, जिससे डायरिया और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और पानी के स्रोतों समेत खाने-पीने की सामग्री के नमूने लेना शुरू कर दिया। साथ ही गांव के लोगों की स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी और मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी। मासूम की मौत के बाद पूरे गांव में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप और कुओं की सफाई तथा स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है।
