मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार से पेट्रोल और डीजल 90 पैसे प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। खास बात यह है कि महज पांच दिन के भीतर ईंधन की कीमतों में दूसरी बार इजाफा हुआ है। इससे पहले 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी।

नई कीमतों के बाद भोपाल में पेट्रोल 110.75 रुपए और डीजल 95.91 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। इंदौर में पेट्रोल 110.79 रुपए, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में 111.27 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। डीजल के दाम भी सभी बड़े शहरों में बढ़ गए हैं।

अब हर चीज पर पड़ेगा असर

ईंधन महंगा होने का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देगा। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। ट्रक और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। खेती-किसानी पर भी इसका असर पड़ेगा। किसानों को ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और अन्य मशीनें चलाने में ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी। इसका असर आने वाले समय में अनाज और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। इसके अलावा बस, ऑटो और स्कूल वाहनों का किराया बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। यानी ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालेंगी।

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अंतरराष्ट्रीय संकट बना वजह

तेल कंपनियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण यह बढ़ोतरी की गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच हालात बिगड़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कुछ समय पहले तक करीब 70 डॉलर प्रति बैरल रहने वाला कच्चा तेल अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। सरकार के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

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ईंधन बचाने की अपील भी

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र करते हुए लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों की खपत कम करना देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए जरूरी है।



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