राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के एक बयान ने मामले में सस्पेंस बढ़ा दिया है। खंडेलवाल ने दावा किया है कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन से जुड़ी जानकारी भाजपा को कांग्रेस के भीतर से ही मिल रही थी। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मीडिया से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के अंदरूनी लोगों ने ही भाजपा को आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराईं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कांग्रेस के भीतर वह कौन नेता या समूह है, जिसने पार्टी के लिए संकट खड़ा किया। भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमलावर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहले ही यह दावा कर चुके हैं कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में हुई चूक की जानकारी कांग्रेस के नेताओं की ओर से ही बाहर आई थी। अब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बयान ने इस मुद्दे को और हवा दे दी है।


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कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी

नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस पहले ही रक्षात्मक स्थिति में नजर आ रही है। वहीं भाजपा के लगातार हमलों के बीच कांग्रेस के भीतर भी आत्ममंथन शुरू हो गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अब यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर नामांकन प्रक्रिया में चूक कहां हुई और क्या वास्तव में अंदरूनी स्तर पर किसी ने जानकारी लीक की थी। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस जहां इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कानूनी और राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और अंदरूनी गुटबाजी का परिणाम बता रही है। 

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सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस 

इस मामले में कांग्रेस पार्टी भारत चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार कर रही है। पार्टी के नेताओं की मानें तो इसके बाद पार्टी की तरफ से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। बता दें, नाम वापसी का 11 जून गुरुवार को अंतिम दिन है। ऐसे में दोपहर तीन बजे के बाद राज्यसभा के  तीन रिक्त पद होने और तीन ही प्रत्याशी होने से रिटर्निंग ऑफिसर तीनों को निर्विरोध चुने जाने की घोषणा कर सकते हैं।

 



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