राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस का हमला लगातार तेज होता जा रहा है। भोपाल में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर राजनीतिक दबाव में फैसला कराने के आरोप लगाए। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पूरी तरह गलत तरीके से निरस्त किया गया है। उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस आधार पर नामांकन खारिज किया, वह एक नॉन-कॉग्निजेबल नोटिस था, जिसे नामांकन में उल्लेखित करना अनिवार्य नहीं था।

लोकतंत्र और कानून दोनों की भावना के खिलाफ कर्रवाई

जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा को यह स्पष्ट हो गया था कि कांग्रेस के सभी 62 विधायक पार्टी के साथ खड़े हैं और किसी तरह की खरीद-फरोख्त संभव नहीं है। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव से बाहर करने के लिए तकनीकी आधार तलाशे गए। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई लोकतंत्र और कानून दोनों की भावना के खिलाफ है। उन्होंने भरोसा जताया कि दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष कांग्रेस की बात सुनी जाएगी और पार्टी को न्याय मिलेगा।

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विक्रांत भूरिया का तीखा हमला

कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान का चीरहरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सवाल कांग्रेस से नहीं, भाजपा से पूछा जाना चाहिए कि आखिर वह मतदान से क्यों डर रही है। भूरिया ने आरोप लगाया कि जब भाजपा कांग्रेस विधायकों को अपने पक्ष में नहीं कर पाई तो प्रत्याशी का नामांकन ही निरस्त करा दिया गया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई भी नोटिस जारी हो सकता है, लेकिन केवल नोटिस के आधार पर किसी उम्मीदवार को चुनाव से बाहर करना गलत है। उन्होंने राजस्थान और झारखंड के उदाहरण देते हुए दावा किया कि ऐसे मामलों में अन्य राज्यों में अलग रवैया अपनाया गया, जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी को पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया गया। भूरिया ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि फैसले की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा हुआ है।

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कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ेगी कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखेगी। चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई एक प्रत्याशी की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की है।

 



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