मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री से पहले ही मौसम ने पूरी तरह करवट ले ली है। सोमवार को मालवा, निमाड़, भोपाल, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि देखने को मिली। कई शहरों में दिन के समय अंधेरा छा गया, जबकि तेज हवाओं से पेड़, होर्डिंग और टावर तक क्षतिग्रस्त हो गए। लगातार बदलते मौसम ने भीषण गर्मी से राहत तो दी, लेकिन कई जगह जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
मालवा-निमाड़ में आंधी का कहर, पेड़ और होर्डिंग गिरे
इंदौर, महू, देवास, धार, पीथमपुर, उज्जैन, शाजापुर और आगर-मालवा में दोपहर बाद मौसम अचानक बदल गया। तेज धूल भरी आंधी के साथ बारिश हुई। इंदौर और राऊ क्षेत्र में बड़े होर्डिंग सड़क पर गिर गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। महू में कई जगह पेड़ उखड़ गए, मकानों और स्कूलों की छतों की चादरें उड़ गईं, जबकि सड़कों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। देवास और आगर-मालवा में तेज हवाओं ने दुकानों और सड़कों पर नुकसान पहुंचाया। उज्जैन में बारिश के बाद उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिली।
भोपाल-सीहोर में बदला मौसम, तापमान में गिरावट
राजधानी भोपाल में दिनभर बादलों की आवाजाही और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। वहीं सीहोर में दोपहर के समय तेज बारिश हुई। घने बादलों के कारण शाम चार बजे ही अंधेरे जैसी स्थिति बन गई और कई क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें जलानी पड़ीं।
बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल में जमकर बरसे बादल
टीकमगढ़, शिवपुरी और गुना में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। टीकमगढ़ में सुबह से मौसम बिगड़ा रहा, जबकि गुना और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई। शिवपुरी में पूरे दिन रुक-रुक कर बारिश का दौर चलता रहा।
नर्मदापुरम और सतपुड़ा क्षेत्र में बारिश-ओलावृष्टि
बैतूल, नर्मदापुरम, सिवनी मालवा और पांढुर्णा में भी तेज बारिश दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में कई स्थानों पर ओले गिरे। पांढुर्णा में महज 20 मिनट की बारिश में नाले-नालियां उफान पर आ गईं और सड़कों पर पानी भर गया। राजगढ़, खिलचीपुर, माचलपुर, जीरापुर, सतना और मंडला में भी बारिश का असर दिखाई दिया। सतना में करीब 20 मिनट तक तेज बारिश हुई, जबकि मंडला में सुबह से रुक-रुक कर पानी गिरता रहा। तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
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मानसून की दस्तक में हो सकती है देरी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में मानसून आमतौर पर 15 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी है। केरल में मानसून की एंट्री में हुई देरी का असर मध्य प्रदेश पर भी पड़ सकता है। अनुमान है कि इस बार मानसून 20 से 22 जून के बीच प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।
अगले कुछ दिन ऐसा ही रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार प्री-मानसून गतिविधियां अभी जारी रहेंगी। प्रदेश के कई जिलों में अगले तीन से चार दिन तक तेज हवाएं, गरज-चमक, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है।
