प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में नया विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून में अवैध कॉलोनियों का निर्माण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की सजा और करोड़ों रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के कारण नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है और शहरी विकास की योजनाएं प्रभावित होती हैं। इसे रोकने के लिए सरकार सख्त कानून ला रही है, जिसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार शासकीय भूमि, विकास प्राधिकरणों, स्थानीय निकायों, वन भूमि, जल स्रोतों, नदियों-तालाबों, पार्कों, खेल मैदानों तथा अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में विकसित की गई कॉलोनियों को अवैध माना जाएगा। ऐसे मामलों में कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।


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अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी तय 

विधेयक में अवैध कॉलोनी निर्माण पर न्यूनतम सात वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक के कारावास के साथ दो से तीन करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं पहले से विकसित अवैध कॉलोनियों को हटाने के लिए सरकार निर्धारित समयावधि देकर कार्रवाई करेगी। समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित भूमि का प्रबंधन सरकार अपने हाथ में लेकर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगी। अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज करता है या कार्रवाई में विलंब करता है तो उसके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण होगा : विजयवर्गीय

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मानसून सत्र में अवैध कॉलोनी को लेकर ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। हम विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक को पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि नए कानून से अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और नागरिकों को नियोजित एवं सुविधायुक्त आवासीय क्षेत्र उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

 

 

 



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