मध्य प्रदेश में हेमंत खंडेलवाल को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बने हुए करीब एक साल होने वाला है। अभी तक वे अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाए हैं। वे कई बार इसे लेकर घोषणा कर चुके हैं, लेकिन सूची आज तक सामने नहीं आ पाई। अब पता चला है कि दिल्ली से भी कार्यकारिणी के नाम फाइनल हो गए हैं। अब शीघ्र ही कार्यकारिणी सामने आ सकती है। यह भी पता चला है कि इस बार की कार्यकारिणी में 100 से लेकर डेढ़ सौ तक पदाधिकारी, सदस्य और विशेष आमंत्रित रहेंगे।
कार्मिक ने नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय ने बनाई तबादला सूची
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की बड़ी तबादला सूची बुधवार शाम अचानक सामने आई तो सभी आश्चर्यचकित थे। सामान्यतः राज्य के प्रशासन में जब इस तरह का फेरबदल होता है तो इसकी चर्चा पहले से चलती रहती है, लेकिन इस बार किसी को कानों कान खबर नहीं लगी। सूत्रों के अनुसार इस बार सूची सामान्य प्रशासन कार्मिक विभाग द्वारा ना बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा बनाई गई। इसमें मुख्यमंत्री की मंशा का विशेष ध्यान रखा गया। हाथों हाथ प्रस्ताव बनाकर कार्मिक से मुख्य सचिव को भेजा गया और सूची जारी हो गई। ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रमोटी आईएएस अधिकारियों को ज्यादा महत्व मिला है।
ठंडे बस्ते में क्यों चले गए इंदौर-भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्षों के नाम?
मध्य प्रदेश में एक ओर जहां अधिकांश आयोग, निगम और प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की नियुक्ति हो गई है, वहीं इंदौर और भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्षों के नाम अभी तक फाइनल नहीं हो पाए हैं। सूत्रों के अनुसार जब बाकी प्राधिकरण के नाम फाइनल हो रहे थे तब इंदौर और भोपाल से भी नाम फाइनल हो गए थे। आदेश जारी होने वाले थे, लेकिन पार्टी में उनका जोरदार विरोध शुरू हो गया। परिणाम यह हुआ कि उस समय उनके नाम के आदेश जारी होने से रोक दिए गए। माना जा रहा था कि कुछ दिनों बाद यह मामला ठंडा हो जाएगा, लेकिन मामला तो ठंडा नहीं हुआ फाइल जरूर ठंडे बस्ते में चली गई।
जब कलेक्टर ने संभाली डॉक्टर की कुर्सी
झाबुआ के कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने जब जरूरत पड़ी तो डॉक्टर की कुर्सी संभाली और देखने लग गए मरीजों को। यह वाक्या उस समय देखने को मिला जब वे जिले के पिटोल में निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्हें पता चला कि डॉक्टर पोस्टमार्टम ड्यूटी पर जिला अस्पताल चले गए हैं और प्राइमरी हेल्थ सेंटर में मरीज-गर्भवती महिलाएं लाइन में खड़ी हैं, तब कलेक्टर डॉ. भरसट ने सिर्फ जांच ही नहीं की, खुद स्टेथोस्कोप गले में लटका कर ओपीडी में बैठ गए। कलेक्टर ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान के लिए ANC की ऑनलाइन एंट्री भी खुद चेक की और मौके पर ही महिलाओं का डेटा अपडेट करवाया।
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