मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में आयोजित होने वाले धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को सभी समाजों की भागीदारी के साथ व्यापक स्वरूप दिया जाए। उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिए कि आगामी महीनों में होने वाले त्योहारों, मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज की आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाया जाए। सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव, श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व जैसे आयोजनों को भी प्रमुखता से मनाया जाए। नागपंचमी के अवसर पर जैव विविधता संरक्षण और सर्प प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 

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वर्ष 2026-27 के ‘कला पंचांग’ का विमोचन

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परंपराएं और पुरातात्विक धरोहर प्रदेश की अमूल्य संपत्ति हैं। इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने संस्कृति विभाग की पुनर्संरचना करने और उसकी गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग द्वारा तैयार किए गए वर्ष 2026-27 के ‘कला पंचांग’ का विमोचन किया। इसमें पूरे वर्ष आयोजित होने वाली सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों का कैलेंडर शामिल है। 

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विक्रमादित्य के जीवन और योगदान पर शोध होगा 

डॉ. यादव ने सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम से अलग अकादमी स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस अकादमी के माध्यम से विक्रमादित्य के जीवन और योगदान पर शोध सहित अन्य गतिविधियां संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के दायरे का विस्तार करने की बात भी कही। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के दो ज्योतिर्लिंगों, प्रमुख शक्तिपीठों और अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को भी इस योजना में शामिल किया जाए। बैठक में श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

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17 धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक का हो रहा निर्माण 

अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 17 धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक तथा 20 संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के तहत लगभग 4160 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि श्रीराम वन गमन पथ, महाकाल लोक और ओरछा में राम राजा लोक सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कलाकारों, साहित्यकारों और पद्म पुरस्कार विजेताओं के सम्मान और सहयोग के लिए भी विशेष योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में जनभागीदारी को बढ़ावा देकर मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाया जाएगा।

 



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