प्रदेश सरकार ने जबलपुर के बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे और जनहानि की घटना की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य शासन ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। सरकार ने आयोग को हादसे के कारणों की जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का दायित्व सौंपा है। साथ ही दुर्घटना के दौरान और उसके बाद किए गए बचाव एवं राहत कार्यों की की भी समीक्षा की जाएगी।
ये भी पढ़ें- कातिल हसीना: पहले प्रेमी के साथ मिलकर दूसरे बॉयफ्रेंड का करवा दिया कत्ल, शव बोरी में भरकर खाई में फेंका
जल परिवहन और क्रूज संचालन का होगा ऑडिट
अधिसूचना में कहा गया है कि आयोग राज्य में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियों का ऑडिट करेगा। इसके साथ ही इनलैंड वेसल एक्ट 2021 और आईएमएम बोट सेफ्टी गाइडलाइंस 2017 के अनुरूप जलयानों के प्रमाणीकरण और सुरक्षा व्यवस्था की जांच भी की जाएगी। आयोग को राज्य में क्रूज, नौकाओं और जल क्रीड़ा गतिविधियों के संचालन एवं रखरखाव के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का सुझाव देने का भी जिम्मा दिया गया है।
ये भी पढ़ें- MP: ISI से जुड़े एमपी के तीन युवक; मंदिर-ढाबा और मिलिट्री कैंप में करने वाले थे धमाका, पाकिस्तान भेजी तस्वीरें
सभी जल गतिविधि स्थलों पर बनेगी क्विक रिस्पांस टीम
सरकार ने आयोग को यह भी देखने के निर्देश दिए हैं कि जहां-जहां जल परिवहन, नौका संचालन, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team) के गठन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ये भी पढ़ें- बहादुर निकला सत्यम: 13 साल के बच्चे ने तेंदुए से भिड़कर बचाई अपनी जान, गर्दन दबोची और धकेलता रहा पीछे
आयोग तीन माह में जांच कर सौपेंगा रिपोर्ट
अधिसूचना के अनुसार, आयोग को मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से तीन माह के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत करनी होगी। आदेश सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव दिनेश कुमार मौर्य द्वारा जारी किए गए हैं। बता दें इससे पहले सरकार ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को 15 दिवस में अपनी रिपोर्ट देनी थी। बता दें, बरगी क्रूज हादसे में अधिकारियों की कई स्तर पर लापरवाही सामने आई है। हादसे में चार बच्चों, आठ महिलाओं और एक पुरुष समेत कुल 13 की मौत हुई थी।
