नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में अजब-गजब वाकया सामने आया। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी ने कालेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ के चैंबर में पहुंचकर आरोपों की झड़ी लगा दी। चतुर्वेदी के करीब नौ मिनट 34 सेकंड के सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो में डीन डॉ. धाकड़ पर डाक्टरों को संरक्षण देने और पुलिस के साथ मिलकर फर्जी एमएलसी रिपोर्ट तैयार कराने के बेहद गंभीर आरोप लगाए। आरटीआई कार्यकर्ता के सीधे और चुभते हुए सवालों के सामने डीन डॉ. धाकड़ कई बार असहज नजर आए और बचाव की मुद्रा में दिखे।

चैंबर में सीधी बहस: भ्रष्टाचार और संरक्षण के लगे आरोप

आरटीआई कार्यकर्ता चतुर्वेदी ने लाइव वीडियो में डीन से पहला तीखा सवाल डॉ. अक्षय निगम को लेकर किया।

आरोप: आप डॉ. निगम की मदद क्यों कर रहे हैं, उन पर खरीदी घोटाले का दोष सिद्ध हो चुका है, लेकिन आप जांच समिति की रिपोर्ट को दबाकर बैठे हैं।

इसके बाद चतुर्वेदी ने दो अन्य डाक्टरों का मुद्दा उठाते हुए डीन को घेरा। उन्होंने दावा किया कि डॉ. राम रावत और डॉ. गौरव कवि भार्गव सरकारी सेवा में होने के बावजूद निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जांच समिति ने इन्हें दोषी भी मान लिया है, लेकिन आपके द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

फर्जी एमएलसी कांड: साले से रिश्तेदारी और डेढ़ साल की देरी पर घेरा

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब चतुर्वेदी ने फर्जी एमएलसी (मेडिकल लीगल केस) कांड को लेकर डीन पर सीधे व्यक्तिगत और प्रशासनिक साठगांठ के आरोप लगाए।

चैंबर में हुई बातचीत के मुख्य अंश:

  • सवाल (आशीष चतुर्वेदी): फर्जी एमएलसी कांड में उपनिरीक्षक आशीष शर्मा को बुलाने के लिए आपने अब तक कितने पत्र लिखे?
  • सवाल (आशीष चतुर्वेदी): धर्मवीर यादव के साथ आपके साले के पुराने संबंध हैं। क्या इसी रिश्तेदारी के कारण आपने इस गंभीर मामले को डेढ़ साल तक लटकाए रखा और धर्मवीर यादव की मदद की।
  • जवाब (डीन डॉ. धाकड़): शहर में रहने के कारण (सामाजिक रूप से) सबके संबंध होते हैं।

25 साल की नौकरी के इतिहास पर सवाल

बहस के आखिरी दौर में जब आरटीआइ कार्यकर्ता ने डीन के प्रशासनिक अनुभवों को लेकर सवाल किए, तो डीन का जवाब चौंकाने वाला था

  • सवाल: आपको नौकरी करते हुए कितना समय हो गया है?
  • जवाब: 25 साल।
  • सवाल: क्या 25 साल के इतिहास में ऐसा कभी हुआ है कि मेडिकल बोर्ड की जांच में संबंधित व्यक्ति को न बुलाया गया हो?
  • जवाब (डीन डॉ. धाकड़): किसी को (जांच या बोर्ड में) बुलाने के लिए हम बाध्य नहीं हैं।

तेजी ने वायरल हो रहा वीडियो: चिकित्सा महाविद्यालय में डीन के चैंबर में आरटीआई कार्यकर्ता के बीच हुई इस लाइव भिड़ंत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक तरफ जहां आरटीआई कार्यकर्ता ने जीआरएमसी प्रशासन को कठघेरे में खड़ा कर दिया है।

अन्य मामलों में भी कठघेरे में हैं डीन: जीआरएमसी डीन डॉ. हितेंद्र यादव को लेकर भी कठघेरे में हैं। इनके मामले में नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की कैंटीन के टेंडर का मामला भी सुर्खियों में बना हुआ है।



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